रांची।एक और साल बीत गया। नए वर्ष का आगमन हो गया। बीते हुए वक्त में हमने क्या खोया और क्या पाया? इस पर दृष्टिपात करने की जरूरत है। ‌बीते साल क्या कमियां रह गई? इससे सबक सीखने की जरूरत है। गुजरे हुए साल में हमारे क्रियाकलाप और हमारी गतिविधियां कैसी रही? इसका आकलन करने से हमें त्रुटियों को सुधारने और कुछ बेहतर करने का अवसर प्राप्त होगा। बीते वर्ष ऐसा क्यों नहीं हो पाया, इसे लेकर सबक सीखा जाना चाहिए। विगत वर्ष के क्रियाकलापों का आकलन कर आने वाले साल को खुशहाल बनाने की दिशा में कदम उठाएं। नव वर्ष में नये संकल्पों के साथ नई ऊर्जा शक्ति का उपयोग सकारात्मक कार्यों में करें। यह सामाजिक नवनिर्माण की परिकल्पना साकार करने में काफी सहायक साबित होगा।यह सोलहो आने सच है कि संकल्पों के ईंधन से ही लक्ष्य के गंतव्य तक पहुंचा जा सकता है। इसलिए दृढ़ संकल्प के साथ निर्धारित लक्ष्य की ओर अग्रसर रहें। वर्तमान समय में हमारे समक्ष कई चुनौतियां हैं





वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण का खतरा फिर से मंडराने लगा है। इसके लिए सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। कोरोना के कारण स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां विकराल रूप धारण कर चुकी है। पर्यावरण प्रदूषण, खाद्य पदार्थों में मिलावट, महंगी दवाएं, अस्पतालों की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं का बाजारीकरण आदि समस्याएं बेहतर स्वास्थ्य को आम आदमी की पहुंच से दूर कर रहा है। वैश्विक महामारी कोविड-19 की लड़ाई में देश की उपलब्धि सराहनीय रही और इससे उबर कर धीरे-धीरे देश का आर्थिक विकास पटरी पर आ रहा है। लेकिन कोविड-19 के एक बार फिर दस्तक देने से चुनौतियां बढ़ गई है। इससे निपटने के लिए सजगता और सक्रियता काफी जरूरी है।





वर्तमान परिवेश में बाजार, वैश्वीकरण और मनुष्य के निजी सुख की बढ़ती महत्वाकांक्षा ने सामाजिकता को हाशिए पर धकेल दिया है। जाति, मजहब,भाषा से जुड़े मुद्दों पर सामाजिक समरसता का अभाव झलकने लगा है।ऐसे में देश सेवा के मूल्यों को पुनः प्रतिष्ठित करना बड़ी चुनौती है। हमें निजी स्वार्थों को दरकिनार कर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने के संकल्पों के साथ नए वर्ष में आगे बढ़ने की जरूरत है। नए वर्ष का जश्न जरूर मनाएं, लेकिन स्वस्थ और समृद्ध समाज निर्माण की कामना के साथ। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि विगत तीन वर्षों में हमने वैश्विक महामारी कोरोना के गहरे जख्म झेले हैं। अपनों को खोया है और लंबी त्रासदी के दौर से गुजरे हैं। इसलिए एक बार फिर कोरोना के बढ़ते संक्रमण से निपटने के लिए सतर्कता और सजगता अत्यंत जरूरी है। नए वर्ष का जश्न मनाने के लिए भीड़-भाड़ और पिकनिक का भी दौर चलेगा। ऐसे में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। सचेत रहने की आवश्यकता है।साथ-साथ सामाजिक समरसता बनाए रखते हुए देश,राज्य व समाज के नवनिर्माण में सहभागिता निभाएं, तभी हम चुनौतियों का सामना करते हुए प्रगति पथ पर अग्रसर होते रहेंगे। (लेखक जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता व श्रीरामकृष्ण सेवा संघ के सहायक सचिव हैं)