विशेष संवाददाता,रांची। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि ये हमारी अस्मिता व स्वाभिमान से जुड़ा मामला संविधान के अनुच्छेद-309 के तहत नियम बनाने की यह शक्ति राज्य की विधान सभा को प्राप्त है। इसी कारण से हम लोगों ने विधेयक बनाने और इस पर विधान सभा की सहमति प्राप्त करने का एवं उसे नौवीं अनुसूची में शामिल करने का निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि हम लोगों ने भी एससी-एसटी एवं पिछड़े श्रेणी के लोगों का आरक्षण 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 67 प्रतिशत करने से संबंधित विधेयक विधानसभा से पास कराकर राज्यपाल के पास भेजा हुआ है। मैं पूरे सदन की ओर से आरक्षण बढ़ाने से संबंधित उक्त विधेयक पर भी शीघ्रताशीघ्र सहमति प्रदान करने का राज्यपाल से आग्रह करता हूं।उन्होंने कहा कि अटॉर्नी जनरल ने अपने परामर्श में वर्ग 4 के लिए तो विधेयक के प्रावधान को संवैधानिक प्रावधानों के अनुकूल पाया है।परंतु वर्ग 3 के मामलों में उनकी राय ऐसी नहीं है। जबकि वस्तुस्थिति यह है कि सभी प्रांतों में और राष्ट्रीय स्तर पर भी सामान्यतः वर्ग 3 और वर्ग 4 की श्रेणी के नौकरियों को एक श्रेणी में रखा जाता है।
उन्होंने कहा कि हम लोगों ने वर्तमान स्थानीयता संबंधित विधेयक को नौवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रावधान भी विधेयक में किया हुआ है,जिससे की इसे न्यायिक प्रक्रियाओं के विरूद्ध सुरक्षा कवच उपलब्ध हो सके। आश्चर्य की बात है कि विद्वान अटॉर्नी जनरल ने इस तथ्य को अपना परामर्श प्रदान करने में कहीं भी संज्ञान में नहीं लिया है। उपरोक्त सभी तथ्यों से ऐसा प्रतीत होता है कि अटॉर्नी जनरल द्वारा दिया गया परामर्श युक्तिसंगत एवं तर्कसंगत नहीं है।
उन्होंने कहा कि वे सदन को बताना चाहते है कि राज्य सरकार ने झारखण्ड राज्य के महाधिवक्ता से इस विषय पर परामर्श प्राप्त किया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से परामर्श दिया है कि विधान सभा द्वारा पारित विधेयक को संसद के द्वारा नौंवी अनुसूची में शामिल कराया जा सकता है एवं तत्पश्चात संविधान के अनुच्छेद 31(बी) के अन्तर्गत उस विधेयक को संविधान के पार्ट-3 अथवा यदि वह किसी न्यायालय के आदेश के प्रतिकूल भी हो तो भी उसे सुरक्षित रखा जा सकता है। अतः उपरोक्त के आलोक में वर्तमान विधेयक में किसी तरह के परिवर्तन की आवश्यकता नहीं है और इसे वर्तमान स्वरूप में ही पुनः पारित कराने का वे सदन से आग्रह करेंगे।





