राज्यहित के मुद्दों पर सार्थक बहस अपेक्षित:नवल किशोर सिंह





संदर्भ:झारखंड विधानसभा का बजट सत्र





पंचम झारखंड विधानसभा के एकादश (बजट सत्र) का शुभारंभ हो चुका है। इसकी शुरुआत सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष के आरंभिक वक्तव्य से हुई। तत्पश्चात राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन का अभिभाषण हुआ। इस दौरान पक्ष-विपक्ष ने शांतिपूर्ण तरीके से सदन के संचालन में भरपूर सहयोग किया।विदित हो कि कई बार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण के क्रम में सदन में विपक्ष द्वारा विरोध प्रकट किया गया,लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। यह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुकूल है। सत्र के पहले दिन सदन की गरिमा बनाए रखने में पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने जिस प्रकार सहयोग किया।पूरे बजट सत्र के दौरान उनसे यही अपेक्षा की जाती है। सत्र के दौरान राज्यहित के मुद्दों पर चर्चा करने की आवश्यकता है।





गौरतलब है कि बजट सत्र में साल भर के लिए राज्य सरकार द्वारा विकास योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की जाती है। यह बजट सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इसमें पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था की रूपरेखा तो निर्धारित होगी ही, साल भर के विकास कार्यों का रोडमैप भी प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त झारखंड में नियोजन नीति का निर्धारण भी होना है। इस दिशा में राज्य सरकार की ओर से सदन में प्रस्ताव पुनः पेश किए जाने की संभावना है। इसके अतिरिक्त तीन-चार अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को भी सदन में पेश किया जाना है।जैसा कि सर्वविदित है, राज्य सरकार द्वारा सदन में पेश किए गए पिछले कई प्रस्तावों पर राज्यपाल द्वारा असहमति जताते हुए उक्त विधेयकों में संशोधन करने का निर्देश दिया गया था। अब राज्य सरकार पुनः उन विधेयकों को संशोधित कर सदन में प्रस्तुत करने की तैयारी में है।





इन विधेयकों पर विस्तृत चर्चा और सार्थक बहस हो, तो राज्यपाल को आपत्ति करने की आवश्यकता ही नहीं होगी।काफी दिनों के बाद झारखंड विधानसभा का यह बजट सत्र लंबी अवधि (27 फरवरी से 24 मार्च 2023 तक कुल18 कार्य दिवस) के लिए प्रस्तावित है। इस दौरान सदन में जनहित व राज्यहित के मुद्दों को जनप्रतिनिधि उठाएं। विधायकों से यह उम्मीद की जानी चाहिए कि सदन में जनहित से जुड़े मुद्दों पर सार्थक बहस हो,तभी सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।बहरहाल, बजट सत्र को लेकर पक्ष और विपक्ष ने तैयारियां पूरी कर ली है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने अलग-अलग समूहों में बैठकें भी की है। इससे ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि दोनों पक्ष एक दूसरे को कटघरे में खड़ा करने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखेंगे। लेकिन जनप्रतिनिधियों को यह भी ध्यान रखने की आवश्यकता है कि सदन में हंगामा न हो, सदन बाधित न हो।निसंदेह सत्र में कुछ ऐसे भी मुद्दे होंगे, जिन पर पक्ष-विपक्ष का अपना-अपना तर्क होगा और उन तर्को पर बहस भी संभावित है, लेकिन सदन का कामकाज प्रभावित न हो, इसका ध्यान भी रखा जाना चाहिए।