नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर चुनाव आयोग (ECI) और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 'वोट चोरी' का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तीखा हमला बोलते हुए भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) की प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से रोकने की भी मांग उठाई है, जिससे उनके अनुसार देश के 13 करोड़ से अधिक नागरिकों का संवैधानिक मताधिकार खतरे में पड़ गया है।

'8 सालों तक राजनीतिक दलों से छिपाई गई सर्च करने योग्य वोटर लिस्ट'

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर जारी एक विस्तृत बयान में कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पिछले दो वर्षों से लगातार मांग कर रहे थे कि ECI सभी राजनीतिक दलों को ऐसे डिजिटल फॉर्मेट में मतदाता सूची उपलब्ध कराए, जिसमें मतदाताओं के नाम और विवरण आसानी से खोजे (सर्च) जा सकें।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि ECI ने इस वाजिब मांग को बार-बार खारिज किया। उन्होंने दावा किया, "2018 में जब कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में लाखों फर्जी मतदाताओं का पर्दाफाश किया था, तभी से चुनाव आयोग ने मशीन से पढ़े जा सकने वाले फॉर्मेट में वोटर लिस्ट देना बंद कर दिया था। वोट चोरी के खेल को अंजाम देने के लिए ही इस मांग को आठ साल तक ठुकराया गया।"

'जनता के दबाव में ECI को पीछे हटना पड़ा'

जयराम रमेश ने चुनाव आयोग के हालिया कदम का जिक्र करते हुए कहा कि 15 अक्टूबर 2026 को ECI ने एक आदेश जारी कर स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) के लिए सर्च करने योग्य डिजिटल वोटर लिस्ट देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि दो साल के लंबे अंतराल के बाद 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SSR की प्रक्रिया फिर से शुरू की गई है, जो इस बात का सबूत है कि आज पूरा देश 'वोट चोरों' के खिलाफ सड़कों पर उतर आया है और आयोग को दबाव में यह कदम उठाना पड़ा।

गौरतलब है कि हाल ही में निर्वाचन आयोग ने 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को मतदाता सूचियों का विशेष संक्षिप्त संशोधन (SSR) करने के निर्देश जारी किए थे, जिसके लिए 1 जनवरी, 2027 को पात्रता तिथि (Qualifying Date) तय की गई है।

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'CEC ज्ञानेश कुमार को अब कोई नहीं बचा सकता'

मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा हमला बोलते हुए जयराम रमेश ने कहा कि CEC प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इशारों पर काम कर रहे हैं, जिससे संवैधानिक संस्था ECI पर जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है।

उन्होंने कहा:

"हर बार जब वोट चोरी पकड़ी जाती है, मोदी सरकार कोई नया हथकंडा अपना लेती है—चाहे वह डिजिटल वोटर लिस्ट बंद करना हो, फर्जी नाम जोड़ना हो या SIR की आड़ लेना। लेकिन इस बार CEC ज्ञानेश कुमार को कोई नहीं बचा सकता, उन्हें अपना पद छोड़ना ही होगा। सिर्फ इस्तीफे से बात नहीं बनेगी, बल्कि ECI के IT सिस्टम में आमूल-चूल बदलाव करना होगा और 13 करोड़ से अधिक भारतीयों के अधिकारों को छीनने वाली SIR प्रक्रिया को तुरंत रोकना होगा।"

इस तीखे बयान के बाद राजनीतिक हलकों में सरगर्मी बढ़ गई है और अब इस पर सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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