नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए हालिया विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके शनिवार (17 अक्टूबर) को रिहा हो गए हैं। हालांकि, पार्टी के दो अन्य प्रमुख नेता सौरव दास और आशुतोष रांका अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं, जिनकी रिहाई को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। जेल से बाहर आने के बाद अभिजीत दीपके ने साफ कर दिया है कि संगठन का आंदोलन यहां रुकने वाला नहीं है और अपने साथियों के बाहर आने के बाद वे आगे की रणनीति तैयार करेंगे।

'साथियों की रिहाई के बाद तय होगी आगे की दिशा'

रिहाई के तुरंत बाद मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि सौरव और आशुतोष के बाहर आने के बाद पार्टी के सभी नेता एक साथ बैठेंगे। इसके बाद ही आंदोलन को और मजबूती से आगे बढ़ाने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

उन्होंने हालिया दिनों में हुई गिरफ्तारियों पर कड़ा एतराज जताया। दीपके ने आरोप लगाया कि प्रशासन और पुलिस द्वारा लोगों को हिरासत में लेकर कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने और उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन CJP इस तरह के दबाव से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने इसे एक लंबी लड़ाई बताते हुए इसके लिए पूरी तरह तैयार रहने की बात कही। साथ ही, उन्होंने अपने दोनों साथियों की जल्द रिहाई की उम्मीद जताते हुए बताया कि वे इस मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर चर्चा के लिए वृंदा मैम से मुलाकात करने जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर शेयर की तस्वीर

अभिजीत दीपके को 16 अक्टूबर को प्रस्तावित मार्च में शामिल होने से पहले ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया था और अगले कुछ शर्तों के साथ उन्हें छोड़ दिया गया था। बाहर आने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर सौरव दास और आशुतोष रांका की एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा— "अब बस अपने भाइयों के रिहा होने का इंतजार है।" उनके इस पोस्ट के बाद से ही संगठन के अन्य सदस्यों की रिहाई की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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किन शर्तों और कानूनी धाराओं के तहत हुई थी गिरफ्तारी?

शनिवार को दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके को मंदिर मार्ग स्थित विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया था:

  • शर्तें और मुचलका: सुनवाई के दौरान उन्हें 50 हजार रुपये का मुचलका भरने और भविष्य में किसी भी तरह से शांतिभंग न करने का लिखित आश्वासन देने के बाद रिहा किया गया।
  • कानूनी धाराएं: पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की थी।
    • धारा 170 के अंतर्गत पुलिस को किसी भी संभावित संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए एहतियातन गिरफ्तार करने का अधिकार होता है।
    • धारा 126 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बांड (मुचलका) भरवा सकता है।

अब सबकी निगाहें सौरव दास और आशुतोष रांका की संभावित रिहाई और उसके बाद CJP के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं।

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