कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद डॉ. शशि थरूर ने अपनी ही पार्टी की अगुवाई वाले विपक्षी गठबंधन और पारंपरिक राजनीतिक रणनीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) और देश की Gen-Z (युवा पीढ़ी) के हालिया आंदोलन का विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यधारा के विपक्षी दलों ने युवाओं के इस बढ़ते जनाक्रोश को समझने में काफी देर कर दी।

'इंडियन एक्सप्रेस' में लिखे अपने लेख में थरूर ने स्वीकार किया कि CJP ने युवाओं के गुस्से को सही दिशा देकर वह हासिल कर दिखाया, जिसे स्थापित राजनीतिक गठबंधन सालों में नहीं कर सके।

CJP आंदोलन के उद्भव पर थरूर के मुख्य बिंदु

  • अपमान से जन्मा आंदोलन: यह आंदोलन किसी राजनीतिक रणनीति या जातीय गणित से नहीं, बल्कि चीफ जस्टिस सूर्यकांत द्वारा बेरोजगार युवाओं को 'कॉकरोच और परजीवी' कहे जाने के विरोध में उपजा।
  • सच्चा जन-आक्रोश: बड़े पैमाने पर पेपर लीक, परीक्षाएं रद्द होने और कोचिंग संस्थानों के शोषण से तंग आ चुके युवाओं के लिए यह व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन देखते ही देखते एक राष्ट्रीय राजनीतिक ताकत बन गया।
  • बड़ा राजनीतिक प्रभाव: CJP ने राष्ट्रीय विमर्श पर कब्जा किया, देशव्यापी प्रदर्शन कराए और अंततः सरकार को पीछे हटने तथा शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने पर मजबूर कर दिया।
"लाखों युवा भारतीयों के गहरे गुस्से को सही दिशा देकर CJP ने वह हासिल कर लिया जो मुख्यधारा के राजनीतिक गठबंधन सालों तक नहीं कर पाए थे।"
— डॉ. शशि थरूर, वरिष्ठ कांग्रेस नेता

विपक्ष की रणनीतियों पर उठाए सवाल और चेताया

डॉ. शशि थरूर ने विपक्षी दलों (जिसकी अगुवाई राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे नेता कर रहे हैं) को आत्मचिंतन करने की सलाह दी है:

पारंपरिक विपक्षी रणनीतिCJP और Gen-Z आंदोलन की सच्चाई
जाति-आधारित समीकरण: मुख्य रूप से जातिगत गणित और धार्मिक धर्मनिरपेक्षता के इर्द-गिर्द केंद्रित।व्यावहारिक समस्याएं: पेपर लीक, बेरोजगारी और कोचिंग के आर्थिक बोझ से परेशान युवाओं का सीधा गुस्सा।
पारंपरिक विरोध प्रदर्शन: जिसे जनता अक्सर 'राजनीतिक फायदे का जरिया' मानकर खारिज कर देती है।सामूहिक आवाज: बिना किसी सत्ता की चाह वाले परेशान युवाओं की सच्ची और सीधी सामूहिक भागीदारी।

विपक्ष के लिए 'वेक-अप कॉल'

हालांकि थरूर ने राहुल गांधी द्वारा एफआईआर दर्ज कराने और युवाओं के पक्ष में उतरने के प्रयासों की सराहना की, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थापित विपक्षी पार्टियां अपने पुराने ढर्रे को बदलकर युवाओं की ऊर्जा को सही जगह नहीं देती हैं, तो भविष्य की जन-आंदोलन की लहरें उनके हाथ से निकल जाएंगी और वे अप्रासंगिक हो जाएंगे।