प्रतिनिधि,मेदिनीनगर,पलामू। मेदिनीनगर झारखण्ड क्रांति मंच के संस्थापक सह केन्द्रीय अध्यक्ष शत्रुघ्न कुमार शत्रु,मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष रामनरेश राम एवं मंच के पलामू जिलाध्यक्ष विजय राम ने मेदिनीनगर के पटेल नगर में संयुक्त प्रेस वार्ता कर अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं व बंधाई देते हुए कहा है कि भारत के संसदीय लोकतंत्र में कारपोरेट के ऑक्टोपसी जकड़न की शिकार सारे प्रमुख परलोकतांत्रिक पार्टियों ने इस देश में सदियों से प्रताड़ित दलित, आदिवासी,पिछड़े व अल्पसंख्यको को पार्टी की मुख्य धारा से भटका कर उन्हें उनकी जातियों व समुदायों के प्रकोष्ठों में लटकाकर भीषण अन्याय किया है,जो राजनीतिक सत्ता के माध्यम से वंचित वर्गों के मानवाधिकारों व नागरिक अधिकारों की प्राप्ति की दिशा में बाधक रहा है।





प्रेस वार्ता में नेताओं ने कहा है कि लगभग सभी दलों में दलित, आदिवासी, पिछड़े व अल्पसंख्यकों के लिए सभी स्तर पर प्रकोष्ठ की पदें आरक्षित हैं, लेकिन आज तक इन प्रमुख दलों में ब्राह्मण,भूमिहार,लाला व राजपूत आदि अगड़ी जातियों के लिए कोई प्रकोष्ठ नहीं बनाया जाता है।बल्कि नीचे से लेकर उपर तक के सभी पदों पर कुंडली मारकर बैठे हुए अगड़ी जाति के दबंग लोग राज्य व केन्द्र की सत्ता में मौज उड़ाते हैं।जबकि संख्या बल के हिसाब से बहुसंख्यक दलित, आदिवासी, पिछड़े व अल्पसंख्यकों को विधानसभा क्षेत्रों व लोकसभा क्षेत्रों में आरक्षित सीटों के अलावा इन्हें टिकट भी नहीं दिया जाता है,जिसका ईवीएम के अलावा तीन राज्यों में कांग्रेस की पराजय का परिणाम भी यही साबित करता है।





संयुक्त वार्ता में नेताओं ने पलामू को देश की स्वर्णवादी राजनीति का नमुना बतलाते हुए कहा है कि यहां भाजपा व कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ब्राह्मण समाज से आते हैं।वहीं प्रमुख सत्ताधारी पार्टी जेएमएम के जिलाध्यक्ष लाला(कायस्थ) समाज से आते हैं,जिनका शासन व सत्ता में पकड़ है।वहीं पिछड़े वर्ग के विश्वकर्मा समाज से आने वाले सत्ता की भागीदार समाजिक न्याय वाले राजद के जिलाध्यक्ष को हर बार मुख्यमंत्री जी के पलामू आगमन पर कुर्सी के लिए जूझना व रोना पड़ता है।आज तक उनके साथ न्याय होते नहीं देखा गया है।





वार्ता के अंत में नेताओं ने कहा है कि मानवाधिकारों व नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए भारत के सभी दलों व सरकारों में हर स्तर पर जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी भागीदार सुनिश्चित की जानी चाहिए तभी संविधान की मूलभूत अवधारणा जमीन पर उतरेगी।