रांची।झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के तहत कार्यरत 39 हजार सहिया के मानदेय की राशि बढ़ाने की केंद्र सरकार से मांग की है।मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडवीया के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में उन्हाेंने कहा कि वर्तमान में सहिया को 2300 रुपए मिलते हैं जो काफी कम है।सहिया को कम से कम पांच हजार रुपए मिलना चाहिए।स्वास्थ्य मंत्री ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर हेपेटाइटिस बी तथा सर्वाइकल कैंसर की जांच की व्यवस्था की भी मांग की।





टीबी के साथ कोविड जांच अनिवार्य की जाए





स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने केंद्र को सुझाव दिया कि टीबी जांच के साथ-साथ कोविड जांच भी अनिवार्य की जानी चाहिए।राज्य में लगाए गए पीएसए आक्सीजन प्लांट के चलाने के लिए कर्मियों की व्यवस्था नहीं है।इन कर्मियों के मानदेय की राशि की व्यवस्था राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के तहत किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि राज्य में मातृ मृत्यु तथा शिशु मृत्यु दर कम करने में काफी काम हुआ है। झारखंड की दर राष्ट्रीय औसत से कम है। संस्थागत प्रसव में भी वृद्धि हुई है। प्रजनन दर कम करने पर काम किया जा रहा है।





446.33 करोड़ रुपये मिले हैं झारखंड को





इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने 15वें वित्त आयोग के तहत मिली राशि का उपयोग स्वास्थ्य संरचनाओं के विकास पर करने पर जोर देते हुए इसे लेकर की जा रही कार्रवाई की जानकारी ली।मंत्री ने बताया कि 15वें वित्त आयोग के तहत मिली राशि से संचालित होनेवाली योजनाओं का स्वीकृति आदेश जारी हो गया है। केंद्र के दिशा-निर्देश पर इस राशि का उपयोग किया जाएगा।





आपको बता दें कि राज्य सरकार ने 15वें वित्त आयोग से स्वीकृत 446.33 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं। ये राशि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य संरचनाओं के विकास पर खर्च होगी। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में भवनहीन स्वास्थ्य केंद्रों के भवनों का निर्माण होगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डायग्नोसिस सेवाओं का विस्तार किया जाएगा तथा ब्लाक पब्लिक हेल्थ यूनिटों की स्थापना की जाएगी। इसी तरह, शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डायग्नोसिस सेवाओं का विस्तार होगा तथा अर्बन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों की स्थापना की जाएगी। वीडियो कांफ्रेंसिंग में राज्य से स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह, अभियान निदेशक डा. भुवनेश प्रताप सिंह आदि उपस्थित थे।