प्रतिनिधि,चतरा। विश्व हिंदू परिषद के कार्याध्यक्ष भुनेश्वर साहू के नेतृत्व में भारत रत्न डॉक्टर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की 132वीं जयंती मनाई गई।चतरा नगर व पांडे महुवा चौक पर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया। इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद, जिला मंत्री सुधीर कुमार व बजरंग दल संयोजक अंकित पांडे विशेष रूप से उपस्थित थे।





जिला मंत्री सुधीर कुमार ने कहा कि 14 अप्रैल 1981 को मध्य प्रदेश के महू में रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई ने अपनी सबसे छोटी संतान को जन्म दिया, जिसका नाम था भिवा रामजी अंबेडकर था,जो बाबा साहब के नाम से प्रसिद्ध हुए। डॉक्टर आंबेडकर अपने 14 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। डॉ. अंबेडकर सामाजिक समानता और समरसता के प्रणेता थे, जिन्होंने वंचितों के उत्थान का संकल्प लेकर उन्हें सामाजिक प्रतिष्ठा एवं समानता का अधिकार दिलाने का कार्य किया। विदेशी आक्रांताओं के अत्याचार एवं दुष्प्रभाव के कारण हिंदू समाज में आए छुआछूत, जातिगत भेदभाव, अस्पृश्यता आदि कुप्रथाओं को दूर करने की दिशा में उनके द्वारा किए गए समाज सुधार के कार्य अतुलनीय हैं। यही वजह है कि बाबा साहब की जयंती को भारत में सामाजिक समरसता दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। समाज में समानता की अलख जलाने वाले अंबेडकर को 1990 में भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया। विश्व हिंदू परिषद भी सभी एक ही भारत मां की संतान है, सहोदर भाई हैं तथा ऐसा भाव जागृत कर सनातन समाज को जोड़ने का कार्य कर रही है। कहा कि आज राष्ट्र एवं समाज की उन्नति के लिए उनके द्वारा बताए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है।





कार्यक्रम में उपस्थित बजरंग दल जिला संयोजक ने कहा डॉ. आंबेडकर की अध्यक्षता में विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान, संविधान सभा द्वारा तैयार किया गया था। अंबेडकर जयंती सामाजिक समरसता एवं जातिगत भेदभाव को मिटाने एवं कुरीतियों को दूर करने की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।बाबा साहब पढ़ने में काफी तेज थे। उनके अंदर हमेशा से ही कुछ नया सीखने की इच्‍छा रहती थी। उनकी इस जिज्ञासु प्रवृत्ति ने उन्‍हें इतनी ऊंचाइयों तक पहुंचने में बड़ी भूमिका निभाई। हम सभी को भी भी बाबा साहब से ये गुण सीखना चाहिए।बाबा साहब समाज के प्रति अपनी जिम्‍मेदारियों को अच्‍छे से समझते थे।उनका मानना था कि हर व्‍यक्ति को समाज के लिए कुछ करना चाहिए ताकि उसके आसपास के लोग भी बेहतर जीवन जी सकें।बाबा साहब खुद की क्षमताओं पर यकीन रखते थे। उनका मानना था कि अगर व्‍यक्ति को खुद पर भरोसा है तो वो बड़े से बड़ा काम भी आसानी से कर सकता है।बाबा साहब हमेशा लोगों को साथ लेकर चले, इसीलिए उनका व्‍यक्तित्‍व इतना बड़ा बन सका। उनका मानना था कि व्‍यक्ति की तरक्‍की में सभी का साथ होता है, इसलिए उसे लोगों को साथ लेकर चलना चाहिए।