विशेष संवाददाता
रांची। हरमू मैदान में श्री राम कथा आयोजन समिति के तत्वावधान में आयोजित रामकथा के छठे दिन राजन जी महाराज के भजनों पर श्रोता गण खूब झूमे।कथा के मुख्य यजमान प्रेमचंद श्रीवास्तव, पत्नी उर्मिला श्रीवास्तव, दैनिक यजवान नेमीचंद अग्रवाल चंद्रकांत रायपत, राम किशोर कुँवर, मदन लखोटिया ,ओमकार जी गुप्ता (बोकारो )राजीव अग्रवाल (रामगढ़ )से इन सभी लोगों ने व्यास पूजन , गुरु पूजन किया व अभिनंदन व स्वागत के साथ आरती की।
कथावाचक राजन जी महाराज के भजनों पर झूमे भक्त, भरत चले चित्रकूट राम को मनाने गाया गीत
भजन
राम कहने से तर जायेगा
भव से सागर उतर जाएगा
बड़ी मुश्किल से मरतन मिला
प्रभु की करुणा से मरतन मिला
जब तक जीवन में पूर्ण अर्जित नहीं होगा संत नहीं मिलेंगे
श्रेष्ठ की आज्ञा का पालन करना इससे बढकर अपने से श्रेष्ठ की कोई दूसरी सेवा नहीं है-राजन जी महाराज
भजन का आनंद जब मिल जायेगा विषय का रस अपने आप छूट जायेगा-राजन जी महाराज
पहाड़ी बाबा की भी चर्चा की
हरमू मैदान में चल रहे सप्तदिवसीय श्रीराम कथा के छठवें दिन शुक्रवार को कथा का रसपान कराते हुए कथावाचक परमपूज्य राजन जी महाराज ने कहा कि प्रभु की भक्ति ही मुक्ति का मार्ग है। राम कहने से तर जायेगा। जो बचपन से भगवान का नाम लेना प्रारंभ नहीं करता, उसका 55 के बाद निकलनेवाला नहीं है। भगवान का नाम लेना स्वाभावजन्य है। संपत्ति बांटने के लिए तो बहुत लोग मिल जायेंगे, जीवन में ध्यान रखें कि आपकी विपत्ति कौन बांट रहा है आपसे। जो स्वामी की अनुपस्थिति को उपस्थिति मानकर स्वयं संस्कार में बना हुआ है यही मनुष्य का सर्वश्रेष्ठ संस्कार है।
कथा की शुरूआत अयोध्या का माहौल भगवान श्रीराम के विरह में शोकाकुल माहौल से प्रारंभ हुई। इस बीच महाराज दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं। श्रीराम के वन की सूचना से भरत व्याकुल हो उठते हैं। यहां महाराज श्री सामाजिक बातों का उल्लेख करते हुए कहते हैं श्राद्धकर्म श्रद्धा का विषय है। आजकल विडंबना है जो लोग ज्यादा पढ लिख गये हैं वे इन सब बातों को ढकोसला मानते हैं। विचार करें, मनुष्य कहां जी रहा है। आप बच्चों को खूब पढायें लेकिन इस पढाई के साथ अपनी संस्कृति से भी बच्चों को जोडने का प्रयास कीजिए। आप यदि श्रद्धा से व्यवहार करेंगे तो आपको देखकर आपकी संतान भी करेगी अन्यथा आनेवाला समय विकराल होनेवाला है। यह कथा कहती है घर में कोई बडा है तो बडे के रहते अपने कभी मालिक नहीं बनना चाहिए। भरत जी कहते हैं कि भैया के रहते मैं सिंघासन पर कैसे बैठ जाउं।
रामकथा के छठवें दिन भजन कीर्तन और मंगलगान से पूरा पंडाल गुंजायमान रहा। जहां ले चलोगे वहीं मैं चलूंगा, राम चरन चित लाई रे भजो राधो गोविंदा भजन सुनकर श्रोता झूम उठे। भरत चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए महाराज श्री ने कहा कि त्रिवेणी जी ने भरत जी को कहा आप सब प्रकार से साधु हैं। साधु कौन है, जिसने अपने आचरण, विचार और व्यवहार को साध लिया है वह साधु है। सुंदरकांड में लिखा है एहि सन हठि करहउं पहिचानी, साधु ते होई न कारज हानि। साधु कभी किसी की हानि नहीं करता। कथा कहती है कि यदि हमारे श्रेष्ठ को हमसे बोलने से पहले कुछ सोचना पडे तो ये हमारा दुर्भाग्य है। जीवन वो है कि हमारा श्रेष्ठ हमसे कुछ भी बोल सकता है। महाराज श्री आगे कहते हैं आनेवाला समय ऐसा लग रहा है कि विवाह के लिए कन्या के घर में लोगों को दहेज देना पडेगा। क्योंकि लडकियां कम होती जा रही है। विडंबना है कि घर में लडकी जन्म ले ले तो कई लोगों को मानो मातम छा गया है। जबकि बेटियां घर का श्रृंगार हैं। जिस घर के आंगन में बेटियां आनंदपूर्वक घूमती हैं और उनका मान-सम्मान होता है वहां 33 कोटि के देवता सर्वकाल विराजमान होते हैं, इसलिए बेटियों का आदर करें।
श्रीराम भरत मिलाप का मार्मिक वर्णन सुनकर पंडाल में बैठे श्रोताओं की आंखें भर गईं और लोग भाव विभोर हो गये। भरत सहित माताएं, गुरूदेव सभी राम को मनाने की कोशिश करते हैं। वशिष्ठ जी के कहने पर भरत श्रीराम की चरणपादुका माथे पर लगाते हैं। भरत जी अयोध्या लौटकर प्रभु की पादुका को सिंघासन पर विराजमान करते हैं। इस दौरान भरतलाल के जयघोष से पूरा पंडाल गूंज उठा।
प्रवक्ता प्रमोद सारस्वत ने बताया कि सप्तदिवसीय रामकथा के अंतिम दिन कथा दोपहर 12:30 बजे से 4 बजे तक होगी।कथा स्थल में प्रातः 11 बजे से रक्तदान शिविर का आयोजन श्री राम कथा आयोजन समिति के सानिध्य में किया गया। रक्तदान शिविर में नागरमल मोदी सेवा सदन , एवं सदर हॉस्पिटल के डॉक्टर की टीम ने अपना योगदान दिया। जबकि मारवाड़ी युवा मंच के सदस्यो ने रक्तदान शिविर का संचालन किया।कथा स्थल व्यास पीठ पर रघुनाथ पांडेय, वीरेंद्र विमल, अतुल गेरा, प्रमोद कुमार पांडे, अरुण कुमार छपरिया, दीपक प्रकाश सहित काफी लोगों ने मारा श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया।
कथा स्थल पर मुख्य संयोजक प्रकाश धेलिया, संयोजक मनीष साहू, प्रवक्ता प्रमोद सारस्वत, बसंत शर्मा, नेमीचंद अग्रवाल, आनंद माणिक, , सज्जन पडिया, दीपक पाठक, श्रवण अग्रवाल, राजू यादव सहित काफी संख्या में सदस्य अपनी सेवा दे रहे थे।





