प्रतिनिधि,शिकारीपाड़ा। प्रखंड के संत रीता मिशन गिरजाघर में रविवार को ईशपुत्र ईसा मसीह का जन्मोत्सव भक्ति, हर्षोलास और बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर गिरजाघर के पाली पुरोहित जोस आलेमकल और तपन हेम्ब्रम ने भारी संख्या में उपस्थित भक्तों के लिए पवित्र मिस्सा बलिदान चढ़ाया। विगत मध्य रात्रि से ही जागरण मिस्सा बलिदान के तहत ईशपुत्र के पवित्र आगमन की भक्तिमय प्रार्थना, स्वागत-सत्कार और पूजा । का सहवर्ष हुआ।जहाँ भारी तदाद में भक्तों ने गिरजाघर में उपस्थित होकर ईशपुत्र के आगमन की प्रार्थना- याचना में सहर्ष शामिल हुए।





इस पक्ष पर पाली पुरोहित जोस अलेमकल ने कहा कि परमपिता परमेश्वर ने इस जगत के लोगों से इतना प्रेम किया कि लोगों को पाप से मुक्ति प्राप्त, क्षमा और पारस्परिक शांति कायम रखते हुए अपने एकलौते पुत्रों को एक पवित्र योजनांतर्गत इस दुनिया में भेजा। दो हजार साल से अधिक के पूर्व बेथलेहेम नामक गांव के एक गरीब घराने में मौजूद गौशाला में हुआ। ईशपुत्र होने के बावजूद भी उन्होंने अपने जन्म स्थान को स्वंय गरीबी, लाचारी और बेबसी स्थिति को चुना और जगत के लोगों को सत्य, अहिंसा, प्रेम,क्षमा,दान और शांति का संदेश दिया।





इस संदर्भ में बाबाबल के पुराने नियम और नए नियम के अनुसार येसु मसीह के पवित्र आगमन को लेकर कई भविष्यवक्ता (नबियों) ने भविष्यवाणियां की थीं। उन्होंने कहा था कि परमपिता अपने संकल्प को नहीं भूलेंगे और दुनिया के लोगों को पाप से मुक्ति और स्वर्ग और जगत के लोगों के बीच नया ईश्वरीय संबंध स्थापित किया जाएगा और आपके ईशपुत्र को भेजा जाएगा। दुनिया भर में ईशपुत्र येसु मसीह के जन्म के संस्कार में ही बड़े ही हर्षोलास और भक्ति के साथ हर साल 25 दिसंबर को बड़ा दिन या मेरी क्रिसमस के रूप में मनाया जाता है।





इस अवसर पर हंटरपाड़ा मिशन गिरजाघर के विशिष्ट ईशपुत्र के जन्म उत्सव की घटनाओं को बेहद आकर्षक तरीके से चित्रित किया गया था जहां एक नावरूपी गोशाला चरणी बनाया गया था जहां गोशाला के चरणी के नाद में लेटे हुए बालक जीसस, बगल में चालाकी से अपने बेटे को निहारती माता मरियम और पिता जोसेफ के प्रतिमा दंडये गए थे तथा साथ में बालक येसु के दर्शन के लिए भोर के तारा को देखकर देखने वाले पूरब के महाराजाओं और भेड़ों के गड़ेरिये की यात्रा की यात्रानामा को बहुत ही आकर्षक तरीके से आकर्षित किया था जो भक्तों के के लिए अत्यंत ही आकर्षण का केन्द्र रहा। यहाँ यह उल्लेख करना आवश्यक है कि ईशपुत्र ईसा मसीह के जन्मोत्सव को यादगार बनाने के लिए रात्रिकालीन जागरण प्रार्थना और दिन भर के मिस्सा बलिदान कार्यक्रम पर जन सैलाब अमार दी गई थी जिसमें बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, युवा-युवती, बड़े-बुजुर्ग और बच्चे-बच्चियां आए थे। जिसके चेहरे पर बड़ा दिन या क्रिस्मस मनाने की खुशियां झलकती दिखाई दे रही थी। वे मिस्सा बलिदान कार्यक्रम के बाईबल के ईशवचन और येसु मसीह के आगमन के उपदेश सुनकर आनंद विभोर हुए।





मिस्सा बलिदान कार्यक्रम के समापन के बाद उपस्थिति भक्तों ने एक दूसरे को ईशपुत्र के जन्मोत्सव का जन्मदिन दिया और आपसी शांति, सौहार्द, क्षमादान और सत्य अहिंसा के राह पर चलने का संदेश लेकर अपने जीवन में पहचान तथा लोगों के प्रचार-प्रसार करने के लिए वापस अपने अपने घर-परिवार की ओर लौटे।





कार्यक्रम को सफल बनाने और गीत संगीत व प्रार्थना संकल्प में चर्च के सहयोगी किटिकिस्ट ज्योतिन टुडू, सिल्वेस्टर सोरेन, आरतीमस हाँसदा, जोसेफ टुडू, सन्नी किस्कू, मार्टिन सोरेन, रोसलीना किस्कू, सबीता मुर्मू, आदोरी हेब्रम, कुमुदिनी सोरेन, पौलिना सोरेन, धर्मबहन सिस्टर सुशाना मुर्मू, सिस्टर कोंचेता हेब्रम सहित भारी तदाद में ईशभक्तजनों ने अपना सहयोग दिया।