नई दिल्ली: महिला आरक्षण विधेयक के लोकसभा में गिर जाने के बाद राजनीति का पारा चरम पर है। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने इस विफलता को लेकर कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन पर तीखा प्रहार किया है। ईरानी ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित होने का जश्न मना रहे हैं, जिसे देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।
"सदन में अट्टहास करने वालों को याद रखेगी जनता" शनिवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान स्मृति ईरानी ने बेहद कड़े शब्दों में सदन की घटनाओं पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा:
"कल लोकसभा में जो लोग मेज थपथपा रहे थे और खिलखिलाकर हंस रहे थे, वे वास्तव में करोड़ों महिलाओं के संघर्ष का उपहास उड़ा रहे थे। यह सिर्फ एक बिल का गिरना नहीं, बल्कि उन महिलाओं के साथ 'धोखा' है जो दशकों से संसद में अपनी हिस्सेदारी का इंतज़ार कर रही थीं।"
गांधी-नेहरू परिवार पर सीधा निशाना ईरानी ने कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे 98 वर्षों की विफलता करार दिया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु रहे:
अक्षमता का आरोप: उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी वाड्रा अपने पूर्वजों के जिस सपने का हवाला दे रही हैं, उसे पूरा करने की क्षमता कांग्रेस ने 98 वर्षों में क्यों नहीं दिखाई?
सत्ता का केंद्रीकरण: स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि गांधी-नेहरू परिवार नहीं चाहता कि देश की कोई गरीब या साधारण महिला राजनीति में आगे आए। वे सत्ता को केवल अपने परिवार तक सीमित रखना चाहते हैं।
विरोध का दोहरा मापदंड: ईरानी ने सवाल उठाया कि जब गृहमंत्री ने सदन में 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा, तब कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी ने उसे स्वीकार क्यों नहीं किया?
प्रधानमंत्री का विजन और विपक्ष का रोड़ा स्मृति ईरानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने एक ऐसा संतुलन बनाने की कोशिश की थी जहाँ महिलाओं को 33% आरक्षण भी मिले और पुरुषों के प्रतिनिधित्व को भी नुकसान न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष द्वारा मौजूदा सीटों में ही आरक्षण की मांग करना पुरुषों के साथ अन्याय करने जैसा था।
विधेयक के गिरने का गणित लोकसभा में शुक्रवार को हुए मतदान में संवैधानिक संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका:
पक्ष में वोट: 298
विपक्ष में वोट: 230
कुल मतदान: 528
पास होने के लिए आवश्यक: 352
निष्कर्ष: स्मृति ईरानी ने अंत में विश्वास जताया कि इस बिल का भविष्य क्या होगा, इस पर प्रधानमंत्री स्वयं देश की जनता को संबोधित करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि विपक्ष की यह 'महिला विरोधी' राजनीति आने वाले चुनावों में उनके लिए भारी पड़ेगी।





