जांजगीर-चांपा।
विकास की आधुनिक परिभाषा जहाँ अक्सर गगनचुंबी इमारतों और आर्थिक निवेशों तक सिमट कर रह जाती है, वहीं छत्तीसगढ़ का जांजगीर-चांपा स्थित सोठी आश्रम समाज के सामने प्रगति का एक अनूठा और मानवीय चेहरा पेश कर रहा है। यह आश्रम केवल कुष्ठ रोगियों के उपचार का केंद्र नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और गरिमा-आधारित पुनर्वास का एक सशक्त वैश्विक मॉडल बन चुका है। बुधवार को सूबे के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस आश्रम का दौरा कर यहाँ की अनुकरणीय सेवा गतिविधियों की सराहना की और इसे 'मानवता, करुणा और सेवा का सच्चा तीर्थ' करार दिया।
मुफ्त चिकित्सा के साथ आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं
सोठी आश्रम वर्तमान में उपेक्षित और जरूरतमंद मरीजों के लिए एक बड़ा संबल बना हुआ है। आश्रम परिसर में संचालित 20 बिस्तरों के अस्पताल में मरीजों को मुफ्त इलाज, दवाइयाँ, भोजन, वस्त्र और आवास की सुविधा दी जा रही है।
जांच की आधुनिक व्यवस्था: आश्रम में मरीजों की सुविधा के लिए अत्याधुनिक लैब और एक्स-रे की व्यवस्था है। गंभीर स्थिति होने पर मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों में भी रेफर किया जाता है।
सेवा का विशाल तंत्र: वर्तमान में यहाँ 75 मरीज स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं, जिनकी चौबीसों घंटे देखभाल के लिए लगभग 120 समर्पित सेवादार तैनात हैं।
अस्पताल का निरीक्षण: मुख्यमंत्री साय ने अपने दौरे के दौरान आश्रम परिसर में स्थित 'संत गुरु घासीदास चिकित्सालय' का बारीकी से निरीक्षण किया और चिकित्सा व्यवस्थाओं पर संतोष जताया।
सिर्फ इलाज नहीं, स्वावलंबन की नई राह
कुष्ठ रोग केवल शारीरिक पीड़ा ही नहीं देता, बल्कि सामाजिक उपेक्षा और भेदभाव का दंश भी लाता है। सोठी आश्रम इसी सामाजिक सोच को बदलने का काम कर रहा है। यह संस्था मरीजों को सिर्फ दवा नहीं देती, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होना भी सिखाती है।
आश्रम में पुनर्वास कार्यक्रम के तहत मरीजों और उनके परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:
खेती और बागवानी, चॉक निर्माण, कालीन व रस्सी बनाना, सिलाई, कंप्यूटर शिक्षा, वेल्डिंग और ड्राइविंग।
इसके साथ ही, समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए मरीजों के बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का भी आश्रम द्वारा विशेष ध्यान रखा जाता है।
स्वास्थ्य शिविरों से मिल रही नई रोशनी: 10 हजार से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन
आश्रम की सेवा का दायरा केवल परिसर तक सीमित नहीं है। संस्था द्वारा समय-समय पर निःशुल्क स्वास्थ्य और नेत्र जांच शिविरों का आयोजन किया जाता है। आश्रम के प्रयासों से अब तक 10 हजार से अधिक जरूरतमंद लोगों के मोतियाबिंद के सफल ऑपरेशन कराए जा चुके हैं। इसी कड़ी में बुधवार को आयोजित भव्य स्वास्थ्य शिविर में 300 से अधिक ग्रामीणों की जांच की गई, जहाँ उन्हें कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूक भी किया गया।
"आत्मसम्मान के साथ जीना हर नागरिक का अधिकार" — मुख्यमंत्री
मरीजों और सेवादारों से आत्मीय संवाद करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा:
"कुष्ठ रोगियों को सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने का अवसर देना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। किसी व्यक्ति को आत्मसम्मान के साथ अपने पैरों पर खड़ा करना ही ईश्वर की सबसे बड़ी सेवा है। सोठी आश्रम ने यह सिद्ध किया है कि करुणा और संकल्प से किसी भी उपेक्षित जीवन को संवारा जा सकता है।"
सामाजिक पुनर्वास का एक अनुकरणीय मॉडल
सोठी आश्रम आज इस बात का जीवंत प्रमाण है कि किसी भी समाज की असली प्रगति इस बात से मापी जानी चाहिए कि वह अपने सबसे कमजोर, उपेक्षित और वंचित तबके को कितना सम्मान और सहारा दे पाता है। यह आश्रम आज छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए सेवा और समावेशन की एक नई मिसाल पेश कर रहा है।





