नई दिल्ली: एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा जारी वित्त वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट ने भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों के तेजी से मजबूत होते आर्थिक प्रभाव को उजागर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 8 प्रमुख क्षेत्रीय दलों ने वित्त वर्ष 2024-25 में चंदा जुटाने के मामले में भाजपा और कांग्रेस को छोड़कर अन्य सभी राष्ट्रीय दलों—जैसे आम आदमी पार्टी (AAP), बहुजन समाज पार्टी (BSP), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सवादी (CPI-M) और नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP)—को काफी पीछे छोड़ दिया है।

चंदे के आंकड़ों में 3 गुना इजाफा

₹20,000 से अधिक के घोषित चंदे के मामले में क्षेत्रीय दलों के खजाने में भारी वृद्धि दर्ज की गई है:

  • वित्त वर्ष 2023-24: क्षेत्रीय दलों को कुल ₹347.69 करोड़ का चंदा मिला था।
  • वित्त वर्ष 2024-25: यह आंकड़ा 198% बढ़कर ₹1,051.56 करोड़ तक पहुंच गया।
  • दान की संख्या: दान की कुल संख्या भी 2,861 (2023-24) से 85% बढ़कर 5,297 (2024-25) हो गई।

शीर्ष 5 क्षेत्रीय दलों—DMK, AITC, YSRCP, TDP और AIADMK—ने मिलकर कुल ₹840.12 करोड़ जुटाए, जो 2024-25 के कुल क्षेत्रीय चंदे का लगभग 79.9% है।

कॉर्पोरेट और इलेक्टोरल ट्रस्ट बने चंदे का मुख्य जरिया

क्षेत्रीय दलों की इस बंपर कमाई में कॉर्पोरेट और इलेक्टोरल ट्रस्ट्स की सबसे बड़ी भूमिका रही:

  • कॉर्पोरेट घराने: कुल चंदे का 61.33% (लगभग ₹644.93 करोड़) सीधे कॉर्पोरेट और व्यापारिक घरानों से प्राप्त हुआ।
  • प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट: इसने 2024-25 में अकेले ₹253.50 करोड़ सहित दोनों वर्षों में कुल ₹434 करोड़ का योगदान दिया।
  • टाइगर एसोसिएट्स: इसने 2024-25 में पाँच किस्तों में ₹160 करोड़ दिए।
  • राज्यों के आधार पर: सबसे अधिक चंदा दिल्ली (₹433.77 करोड़), पश्चिम बंगाल (₹172.93 करोड़) और महाराष्ट्र (₹158.80 करोड़) के पते वाले दानदाताओं से मिला।

अज्ञात डोनर्स और नकद चंदे पर उठे गंभीर सवाल

चुनाव आयोग के नियमानुसार ₹20,000 से कम के चंदे के लिए दानकर्ता की जानकारी देना अनिवार्य नहीं है। ADR रिपोर्ट के अनुसार इस नियम के तहत कई संदिग्ध प्रवृत्तियां सामने आई हैं:

  1. अज्ञात दानकर्ताओं में 4470% की वृद्धि: अनाम दानदाताओं से मिलने वाला चंदा 2023-24 के ₹6.62 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹302.67 करोड़ हो गया।
  2. नकद (Cash) चंदे का खेल: कैश में प्राप्त चंदा ₹6.54 करोड़ से सीधे उछलकर ₹301.44 करोड़ पहुँच गया।
  3. DMK का मामला: तमिलनाडु की सत्तारूढ़ DMK को सबसे ज्यादा ₹365.78 करोड़ का चंदा मिला, लेकिन इसमें से ₹300.64 करोड़ (लगभग 82%) ऐसे अज्ञात डोनर्स से आए, जिन्हें ₹20,000 से कम के नकद चंदे के रूप में दिखाया गया है।
  4. बिना PAN विवरण का चंदा: बिना पैन कार्ड (PAN) डिटेल्स वाले चंदे का मूल्य 2023-24 के ₹7.68 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹329.58 करोड़ (कुल चंदे का 31.3%) हो गया।
  5. AITC (तृणमूल कांग्रेस): TMC को प्राप्त ₹184.96 करोड़ में से अधिकांश चेक या ड्राफ्ट से आए, लेकिन डोनर्स के पते या पैन जैसे विवरण अधूरे थे। (उल्लेखनीय है कि 15 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड योजना रद्द किए जाने से पहले TMC ने बॉन्ड से ₹612.42 करोड़ और BRS ने ₹495.52 करोड़ जुटाए थे।)

33 दलों ने अब तक नहीं जमा किया हिसाब

ADR ने यह भी उजागर किया है कि देश की 67 मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टियों में से 33 पार्टियों ने अपनी चंदे की रिपोर्ट अब तक भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को नहीं सौंपी है। इनमें जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC), असम गण परिषद (AGP), बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट, टिपरा मोथा और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक जैसे कई प्रमुख राजनीतिक दल शामिल हैं।