गुवाहाटी: असम विधानसभा चुनाव की आहट के बीच राज्य की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। गुरुवार को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के तीन निलंबित विधायकों—कमलाख्या दे पुरकायस्थ, बसंत दास और शशि कांत दास—ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। गुवाहाटी स्थित भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित एक भव्य समारोह में इन नेताओं ने भगवा ध्वज हाथ में लिया।
'राष्ट्र हित और विकास' को बताया आधार
भाजपा में शामिल होने के बाद तीनों नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के विकास कार्यों की जमकर सराहना की।
कमलाख्या दे पुरकायस्थ ने कहा: "हमने यह निर्णय राष्ट्र हित और असम की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए लिया है। राज्य के विकास और नागरिकों की सुरक्षा के लिए भाजपा के साथ खड़ा होना समय की मांग है।"
शशि कांत दास ने इस दिन को अपने लिए ऐतिहासिक बताया और कहा कि वह सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के असम को आगे ले जाने के प्रयासों से प्रेरित हैं।
बसंत दास ने विश्वास जताया कि भाजपा के साथ जुड़ने से उनके निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों की गति और तेज होगी।
मुख्यमंत्री ने बताया 'ऐतिहासिक दिन'
इस अवसर पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया मौजूद रहे। सीएम सरमा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा:
"आज भाजपा के लिए एक बड़ा दिन है। तीन विधायकों का शामिल होना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के प्रति जनता के बढ़ते विश्वास और भाजपा की लोकप्रियता का प्रमाण है।"
कांग्रेस के लिए बढ़ती मुश्किलें
गौरतलब है कि ये तीनों विधायक पहले से ही 'पार्टी विरोधी गतिविधियों' के कारण कांग्रेस से निलंबित चल रहे थे। इनकी भाजपा में एंट्री पिछले महीने पूर्व असम कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा के पाला बदलने के ठीक बाद हुई है। चुनाव से ठीक पहले शीर्ष और अनुभवी नेताओं का इस तरह साथ छोड़ना कांग्रेस के लिए एक बड़ी रणनीतिक चुनौती माना जा रहा है।
राजनीतिक प्रभाव
असम विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी राजनीतिक पार्टियों के लिए यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण है। कांग्रेस के इन कद्दावर नेताओं के भाजपा में आने से न केवल सत्ताधारी दल की स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि विपक्षी खेमे में भी खलबली मच गई है।





