मथुरा/वृंदावन। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देकर सुर्खियों में आए पूर्व पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने अब अपनी नई राजनीतिक पारी का शंखनाद कर दिया है। कान्हा की नगरी वृंदावन की पावन धरा को साक्षी मानकर उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पार्टी 'राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा' की घोषणा की। इस अवसर पर उन्होंने न केवल पार्टी के उद्देश्यों को साझा किया, बल्कि आधिकारिक पार्टी चिन्ह भी जारी किया।
नौकरी और सिद्धांतों की लड़ाई
अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा प्रदेश की नौकरशाही में काफी चर्चा का विषय रहा था। उन्होंने यूजीसी एक्ट के कुछ प्रावधानों और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के कथित अपमान के मुद्दे पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए सरकारी सेवा से त्यागपत्र दे दिया था। उनका मानना है कि धर्म और अधिकारों की रक्षा के लिए पद का त्याग करना आवश्यक था।
वृंदावन से 'राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा' का उदय
पार्टी की लॉन्चिंग के दौरान अलंकार ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी जनता के अधिकारों और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित रहेगी।
पार्टी का नाम: राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा
मुख्य उद्देश्य: नागरिक अधिकारों की बहाली, धार्मिक गुरुओं का सम्मान और व्यवस्था में सुधार।
रणनीति: प्रशासनिक अनुभव का उपयोग कर राजनीति में पारदर्शिता लाना।
अलंकार अग्निहोत्री का बयान: "व्यवस्था के भीतर रहकर जिन अधिकारों की रक्षा करना कठिन हो रहा था, अब उनके लिए सड़क से सदन तक संघर्ष किया जाएगा। 'राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा' आम आदमी की आवाज बनेगा।"
बदलेंगे क्षेत्रीय समीकरण?
एक अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी का राजनीति में उतरना और सीधे 'अधिकारों' की बात करना, आने वाले समय में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और ब्रज क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। सरकारी तंत्र की बारीकियों को समझने वाले अलंकार अब जनता के बीच किस तरह अपनी पैठ बनाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।





