गुवाहाटी/रांची | असम विधानसभा चुनाव के लिए विपक्षी एकता की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। लंबे समय से चल रही खींचतान के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के बीच गठबंधन की बातचीत बेनतीजा रही। परिणामस्वरुप, झामुमो ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला करते हुए असम की 21 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है।
पार्टी महासचिव और प्रवक्ता विनोद पांडेय द्वारा जारी इस सूची ने यह साफ कर दिया है कि झामुमो अब आदिवासी बहुल और चाय बागान वाले इलाकों में कांग्रेस और भाजपा दोनों के खिलाफ मजबूती से ताल ठोकने जा रही है।
प्रमुख सीटें और उम्मीदवार: एक नजर में
पार्टी ने उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया है जहाँ 'टी-ट्राइब' और झारखंडी मूल के आदिवासियों की संख्या निर्णायक है:
| विधानसभा सीट | उम्मीदवार का नाम |
|---|---|
| मजबत | प्रीति रेखा बारला |
| विश्वनाथ | तेहरू गौर |
| खुमतई | अमित नाग |
| सोनारी | बलदेव तेली |
| दुमदुमा | रत्नाकर तांती |
| चाबुआ | भूपेन मुरारी |
| डिगबोई | भरत नायक |
| नहरकटिया | संजय बाघ |
(इसके अलावा तिंगखौंग, रांगापाड़ा, माकुम और बोकाजन जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर भी प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की गई है।)
क्यों टूटा गठबंधन का गणित?
सूत्रों के अनुसार, सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच सहमति नहीं बन पाई।
झामुमो की मांग: पार्टी कम से कम 7 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती थी।
कांग्रेस का रुख: कांग्रेस केवल 5 सीटें देने पर अड़ी रही।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व से चर्चा भी की, लेकिन आदिवासी क्षेत्रों में अपने बढ़ते जनाधार को देखते हुए झामुमो ने कम सीटों पर समझौता करने के बजाय अकेले मैदान में उतरना बेहतर समझा।
हेमंत सोरेन की सक्रियता और स्टार प्रचारक
असम के चुनावों को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पिछले कई महीनों से वहां रैलियां और जनसभाएं कर रहे हैं। पार्टी ने 20 स्टार प्रचारकों की सूची भी जारी की है, जिसमें हेमंत सोरेन के साथ कल्पना सोरेन, मंत्री हफीजुल हसन और सांसद विजय हांसदा जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
असम में 'तीर-कमान' को मिली पहचान
चुनाव आयोग ने झामुमो को असम में भी उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न 'तीर-कमान' पर चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी है। पार्टी का मानना है कि अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों और चाय बागान श्रमिकों के बीच यह पहचान उन्हें बढ़त दिलाएगी।
निष्कर्ष: आदिवासियों के 'हक' पर केंद्रित है चुनावी एजेंडा
गठबंधन न होने पर झामुमो का कहना है कि वे आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन और एसटी (ST) दर्जे की मांग को लेकर प्रतिबद्ध हैं। अब झामुमो की इस सक्रियता से असम के कई सीटों पर चुनावी समीकरण रोचक हो गए हैं, जिससे वोटों के ध्रुवीकरण का सीधा असर बड़े दलों के परिणामों पर पड़ सकता है।





