कोलकाता | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के रण में इस बार एक दिलचस्प और बौद्धिक रुझान देखने को मिल रहा है। राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों—तृणमूल कांग्रेस, भाजपा और वाममोर्चा—ने इस बार कानून के जानकारों और दिग्गज अधिवक्ताओं पर भारी भरोसा जताया है। संविधान और कानून की बारीकियों को अदालत में समझाने वाले ये चेहरे अब 'जनता की अदालत' में वोट मांगते नजर आएंगे।
भाजपा: कानूनी योद्धाओं की सबसे बड़ी फौज
कानूनी दिग्गजों को टिकट देने के मामले में भारतीय जनता पार्टी फिलहाल सबसे आगे है। पार्टी ने अब तक 11 अधिवक्ताओं को मैदान में उतारा है:
प्रियंका टिबरेवाल (इंटाली): कोलकाता की इस सीट से चुनावी मैदान में हैं। टिबरेवाल वही चेहरा हैं जिन्होंने 2021 के उपचुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनौती दी थी।
कौस्तव बागची (बैरकपुर): अपनी मुखर बयानबाजी के लिए मशहूर बागची बैरकपुर से भाजपा की कमान संभाल रहे हैं।
तरुण ज्योति तिवारी (राजारहाट गोपालपुर): हाई कोर्ट के सक्रिय वकील तिवारी को पार्टी ने एक महत्वपूर्ण सीट से जिम्मेदारी दी है।
संभावना: भाजपा ने अभी 294 में से 255 सीटों पर ही उम्मीदवार घोषित किए हैं, जिससे वकीलों की यह संख्या और बढ़ सकती है।
वाममोर्चा: अनुभव और युवा जोश का संगम
वाममोर्चा ने 7 वकीलों को टिकट दिया है, जिसमें अनुभवी चेहरों के साथ-साथ युवाओं को भी तरजीह दी गई है:
बिकास रंजन भट्टाचार्य (जादवपुर): कलकत्ता हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बिकास रंजन इस सूची का सबसे बड़ा नाम हैं।
सायन बनर्जी (महेशतल्ला): तमलुक से लोकसभा चुनाव लड़ चुके युवा सायन बनर्जी अब विधानसभा में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
सौम्यजीत राहा (बिधाननगर): एक और युवा चेहरा जिन्हें पार्टी ने अहम जिम्मेदारी दी है।
तृणमूल कांग्रेस: विरासत और अनुभव की जुगलबंदी
सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने 5 पेशेवर वकीलों को चुनावी मैदान में उतारा है:
शीर्षन्य बंद्योपाध्याय (उत्तरपाड़ा): हाई कोर्ट के अधिवक्ता और वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के पुत्र शीर्षन्य को पार्टी ने मौका दिया है।
शुभाशीष चक्रवर्ती (बेहला पूर्व): पूर्व राज्यसभा सांसद और अनुभवी कानूनी जानकार शुभाशीष इस बार विधानसभा पहुंचने की तैयारी में हैं।
विरासत: गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, चंद्रिमा भट्टाचार्य और मलय घटक जैसे शीर्ष नेता स्वयं कानून की डिग्री धारक हैं।
पार्टियों का 'लीगल' स्कोरकार्ड (एक नजर में)
| पार्टी | कुल वकील उम्मीदवार | प्रमुख चेहरा |
|---|---|---|
| भाजपा | 11 | प्रियंका टिबरेवाल |
| वाममोर्चा | 07 | बिकास रंजन भट्टाचार्य |
| तृणमूल कांग्रेस | 05 | शीर्षन्य बंद्योपाध्याय |
🖋️ राजनीतिक विश्लेषण: क्यों जरूरी हैं कानून के जानकार?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा में कानून के जानकारों की मौजूदगी से नीति-निर्धारण (Policy Making) और विधायी कार्यों में गुणवत्ता आती है। अभी कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की है; जानकारों का मानना है कि कांग्रेस की लिस्ट आने के बाद चुनावी मैदान में वकीलों की कुल संख्या में और बड़ा इजाफा हो सकता है।





