पटना:

बिहार की राजनीति में एक बार फिर पुराने दौर के विवादों और घोटालों को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। बिहार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के शासनकाल पर अब तक का सबसे तीखा प्रहार किया है। सरावगी ने आरोप लगाया कि राजद के दौर में बिहार में अपराधियों को सीधा सत्ता का संरक्षण प्राप्त था। उन्होंने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर देश का सबसे बड़ा घोटाला करने का आरोप लगाते हुए उनके एक पुराने सियासी फैसले पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

लालू के पुराने फैसले पर घेरा: "राबड़ी देवी को नाम लिखना तक नहीं आता था"

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने लालू यादव के कार्यकाल की याद दिलाते हुए उन पर परिवारवाद और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। सरावगी ने कहा:

"भ्रष्टाचार के मामले में सजा मिलने के बाद जब लालू यादव जेल जा रहे थे, तब उन्हें अपनी ही पार्टी के किसी योग्य नेता पर भरोसा नहीं था। यही वजह थी कि उन्होंने अपनी निरक्षर पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया, जिन्हें ठीक से अपना नाम लिखना यानी हस्ताक्षर करना तक नहीं आता था।"

"तेजस्वी को गंभीरता से नहीं लेती बिहार की जनता"

नेता प्रतिपक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को आड़े हाथों लेते हुए संजय सरावगी ने कहा कि उन्हें बिहार के विकास और जनता की बुनियादी समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि तेजस्वी यादव को कहीं बाहर जाना था, इसलिए उन्होंने तय समय से तीन दिन पहले ही पार्टी का स्थापना दिवस मना लिया, जो राजनीतिक इतिहास में पहली बार देखने को मिला है। सरावगी ने दावा किया कि तेजस्वी की बयानबाजी को अब जनता और राजनीतिक हलके के लोग बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लेते हैं।

सरावगी के तीर: राजद को घेरने के 4 मुख्य बिंदु

क्र.सं.हमलाभाजपा अध्यक्ष का तर्क
1.भ्रष्टाचार पर प्रहारलालू प्रसाद यादव देश के सबसे बड़े घोटाले के दोषी और सजायाफ्ता हैं।
2.परिवारवाद का आरोपयोग्यता को दरकिनार कर केवल परिवार के सदस्य को सत्ता सौंपना बिहार के साथ अन्याय था।
3.अपराधियों को संरक्षणराजद सरकार में अपराधियों और माफियाओं को खुली छूट थी, जिससे बिहार कई दशक पीछे चला गया।
4.नेतृत्व पर सवालतेजस्वी यादव के दावों में कोई सच्चाई नहीं होती और जनता उन्हें पूरी तरह खारिज कर चुकी है।

क्यों बाहर आ रहा है 'जंगलराज' का पुराना जिन्न?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में आगामी बांकीपुर उपचुनाव को देखते हुए भाजपा ने अपनी रणनीति के तहत राजद के पुराने शासनकाल के मुद्दों को दोबारा हवा देना शुरू कर दिया है। भाजपा एक बार फिर मतदाताओं के सामने राजद के दौर की कानून-व्यवस्था और मौजूदा सुशासन की तुलना कर अपनी राजनीतिक जमीन को और मजबूत करने की कोशिश में है।

संजय सरावगी के इस कड़े बयान के बाद सूबे की सियासी तपिश बढ़ गई है और आने वाले दिनों में राजद की तरफ से भी इस पर तीखा पलटवार होना तय माना जा रहा है।