पटना/नई दिल्ली: बिहार की राजनीति में होली के रंग के साथ-साथ कयासों का बाजार भी बेहद गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और उनके पुत्र निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री की कमान सौंपे जाने की खबरों ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। हालांकि, एनडीए के प्रमुख सहयोगी चिराग पासवान ने इन तमाम अटकलों पर पूर्णविराम लगाने की कोशिश की है।
क्या है पूरा मामला?
होली के दिन से ही मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई कि नीतीश कुमार बिहार की सक्रिय राजनीति छोड़कर दिल्ली का रुख कर सकते हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि:
नीतीश कुमार राज्यसभा जा सकते हैं।
उनके पुत्र निशांत कुमार को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाकर सक्रिय राजनीति में उनकी 'सरप्राइज एंट्री' कराई जा सकती है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इन दावों पर अब तक जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की ओर से न तो कोई आधिकारिक खंडन आया है और न ही कोई स्पष्टीकरण जारी किया गया है, जिससे संशय और बढ़ गया है।
चिराग पासवान का रुख: 'सवालों को किया खारिज'
इन चर्चाओं के बीच केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कड़ा रुख अपनाया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने इन अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा:
"ऐसी किसी भी परिस्थिति के बनने का सवाल ही पैदा नहीं होता। बिहार में नीतीश कुमार के अनुभवी नेतृत्व में एक मजबूत और स्थिर सरकार चल रही है। 200 से अधिक विधायकों के समर्थन वाली यह डबल इंजन सरकार प्रधानमंत्री मोदी की सोच के अनुरूप विकास कार्य जारी रखेगी।"
राज्यसभा चुनाव: गणित और दावेदारी
बिहार की 5 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए 5 मार्च नामांकन की अंतिम तिथि है। सीटों का समीकरण कुछ इस प्रकार है:
| पार्टी/गठबंधन | सीटों की संख्या | संभावित उम्मीदवार |
|---|---|---|
| भाजपा | 02 सीटें | नाम अभी घोषित होना शेष |
| रालोमो | 01 सीट | उपेंद्र कुशवाहा (लगभग तय) |
| जदयू | 02 सीटें | रामनाथ ठाकुर (एक सीट पर तय) |
निशांत कुमार की एंट्री पर सस्पेंस:
जदयू के हिस्से की दूसरी सीट को लेकर ही सबसे अधिक सस्पेंस बना हुआ है। चर्चा है कि क्या निशांत कुमार को इस सीट के जरिए सदन भेजा जाएगा? फिलहाल सबकी नजरें जदयू की आधिकारिक सूची पर टिकी हैं, जो किसी भी वक्त जारी हो सकती है।
निष्कर्ष
बिहार की राजनीति में अक्सर 'खामोशी' किसी बड़े तूफान का संकेत मानी जाती है। जदयू की चुप्पी और चिराग पासवान का बचाव, दोनों ही राज्य की भावी तस्वीर को लेकर सस्पेंस बढ़ा रहे हैं। क्या नीतीश कुमार वाकई दिल्ली की राह पकड़ेंगे या यह महज एक अफवाह साबित होगी? इसका फैसला अगले 24 घंटों में नामांकन प्रक्रिया के साथ साफ हो जाएगा।





