नई दिल्ली।

कांग्रेस संगठन में संभावित और बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट के बीच देश की राजधानी में सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को 10 जनपथ स्थित अपने आवास पर पार्टी के कई बेहद अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं के साथ एक हाई-प्रोफाइल बैठक की। सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक महज एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि देश के मौजूदा राजनीतिक हालात, आगामी संगठनात्मक बदलावों और कांग्रेस को एक बार फिर जमीनी स्तर पर पुनर्जीवित करने की रणनीति को लेकर हुआ एक गंभीर वैचारिक मंथन था।

10 जनपथ पहुंचे कांग्रेस के संकटमोचक, सौंपी फीडबैक रिपोर्ट

इस रणनीतिक बैठक में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी, मुकुल वासनिक, पवन बंसल और यामि याग्निक समेत कई पुराने और कद्दावर नेताओं ने शिरकत की।

बैठक के दौरान इन वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को विभिन्न राज्यों के राजनीतिक परिदृश्य और संगठन की जमीनी हकीकत पर आधारित एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी। सूत्रों के अनुसार, सोनिया गांधी ने नेताओं से इस बात पर सीधा फीडबैक लिया कि संगठन में किए जा रहे बदलावों को कैसे सीधे आम जनता से जोड़ा जाए और कार्यकर्ताओं को दोबारा कैसे सक्रिय किया जाए।

रणनीति: 'सड़क से सदन तक' आक्रामक होगी कांग्रेस

बैठक में मौजूद दिग्गजों ने पार्टी को मजबूत करने और मोदी सरकार के खिलाफ प्रभावी ढंग से जनता के बीच उतरने के लिए कई अहम सुझाव दिए। नेताओं का स्पष्ट मानना था कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक धार तेज करने के लिए केवल बड़े शहरों या संसद तक सीमित नहीं रहना होगा। पार्टी को अब:

त्रिसदस्यीय सक्रियता: संसद से लेकर सीधे पंचायत स्तर तक लगातार एक्टिव रहना होगा।

जनता के मुद्दे: जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों को सड़क से लेकर सदन तक इतनी मजबूती से उठाना होगा कि सरकार बैकफुट पर आने को मजबूर हो जाए।

अनुभव और युवा जोश का दिखेगा संतुलन, बन सकती है नई समिति

बैठक से यह साफ संकेत मिले हैं कि कांग्रेस आलाकमान आगामी संगठनात्मक फेरबदल में पुराने और अनुभवी चेहरों की भूमिका को और बढ़ाने जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मुख्य फोकस अब युवाओं के जोश और वरिष्ठों के तजुर्बे के बीच एक सटीक संतुलन (Balance) बिठाकर नई जिम्मेदारियां सौंपना है। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इन संगठनात्मक बदलावों को सुचारू रूप से लागू करने के लिए जल्द ही एक विशेष नई समिति के गठन पर भी अंतिम फैसला लिया जा सकता है।