चंडीगढ़ | वर्ष 2021 के नगर निगम चुनाव में सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए समय का चक्र उल्टा घूमता नजर आ रहा है। कभी 14 पार्षदों के साथ सदन में दबदबा रखने वाली 'आप' अब अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। दल-बदल के इस खेल में सबसे दिलचस्प मोड़ यह है कि जिस कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में 'आप' ने कंधा दिया था, वही अब नगर निगम में उसकी जड़ें खोदने में सबसे आगे है।

14 से 10 पर सिमटी 'आप': आंकड़ों का खेल

दिसंबर 2021 के नतीजों ने सबको चौंका दिया था जब 'आप' ने 14 सीटें जीतकर भाजपा (12) और कांग्रेस (8) को पीछे छोड़ दिया था। लेकिन 2026 के आगामी चुनावों से पहले स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है:

ताजा स्थिति: 'आप' के पास अब केवल 10 पार्षद बचे हैं।

कांग्रेस की सेंधमारी: पिछले एक महीने में ही प्रेमलता और दमनप्रीत सिंह जैसे कद्दावर पार्षदों ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है।

भाजपा का प्रहार: इससे पहले भाजपा ने सुमन देवी, पूनम और लखबीर सिंह बिल्लू को अपनी ओर कर 'आप' को शुरुआती झटके दिए थे।

दोस्ती में दगा? लोकसभा का साथ और निगम में घात

राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा 'आप' और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर है।

"जिस कांग्रेस प्रत्याशी मनीष तिवारी को 'आप' के पार्षदों ने अपने वार्डों से लीड दिलाकर संसद पहुंचाया, उसी कांग्रेस ने अब 'आप' के कुनबे में सेंध लगा दी है। लोकसभा चुनाव में गठबंधन की मिठास, मेयर चुनाव के बाद कड़वाहट में बदल गई है।"

दल-बदल की सूची: किसने कहाँ मारी बाजी?

नगर निगम सदन अब राजनीतिक दल-बदल का केंद्र बन गया है। नीचे दी गई तालिका से स्थिति स्पष्ट होती है:

पार्षद का नामकहाँ सेकहाँ गए
दमनप्रीत सिंहआपकांग्रेस
प्रेमलताआपकांग्रेस
तरुणा मेहताआपकांग्रेस
लखबीर सिंह बिल्लूआपभाजपा
पूनम/सुमन देवीआपभाजपा
हरप्रीत कौर बबलाकांग्रेसभाजपा
हरदीप सिंहशिअदआप

भाजपा की रणनीति: टूटने से ज्यादा तोड़ने पर जोर

जहाँ एक ओर 'आप' और कांग्रेस के पार्षद इधर-उधर हो रहे हैं, वहीं भाजपा अपने कुनबे को एकजुट रखने में सफल रही है। इसी रणनीतिक बढ़त के कारण भाजपा 5 वर्षों के कार्यकाल में 4 बार अपना मेयर बनाने में सफल रही, जबकि सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद 'आप' केवल एक बार ही मेयर की कुर्सी तक पहुँच पाई।

निष्कर्ष: 2026 की राह हुई कठिन

अब सदन में कांग्रेस और 'आप' का संख्याबल लगभग बराबर होने की ओर है। यदि एक-दो पार्षद और पाला बदलते हैं, तो 'आप' सदन में तीसरे नंबर की पार्टी बन सकती है। चर्चा यह भी है कि कुछ और पार्षद दूसरे दलों के संपर्क में हैं, जिससे 2026 के निगम चुनाव से पहले चंडीगढ़ की राजनीति में बड़े उलटफेर की संभावना बनी हुई है।