नई दिल्ली:
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। गुरुवार (30 जुलाई, 2026) को एक तीखे बयान में दीपके ने दावा किया कि बीते 20 जुलाई को 'संसद चलो मार्च' के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग का आदेश केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से ही आया होगा। इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उन्होंने गृह मंत्री से तुरंत इस्तीफे की मांग की है।
अभिजीत दीपके ने यह भी खुलासा किया कि छात्र आंदोलन के दौरान उन्हें लगातार धमकियां दी गईं और राजनीतिक दबाव बनाया गया।
"बीजेपी में शामिल होने का बनाया गया दबाव"
अपने ऊपर बने दबाव का जिक्र करते हुए दीपके ने कहा, "मुझे साफ तौर पर कहा गया था कि या तो मैं भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो जाऊं, वरना मेरे परिवार को गंभीर परिणामों और मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। यह बेहद शर्मनाक है कि देश के शीर्ष पदों पर बैठे लोग इस तरह की धमकियों का सहारा ले रहे हैं।"
युवाओं को गुमराह करने के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार से सवाल पूछना, शिक्षा, लोकतंत्र और अपने भविष्य के अधिकारों के लिए लड़ना कोई अपराध या संस्कृति को भ्रष्ट करना नहीं है। उन्होंने संकल्प जताते हुए कहा कि वे इस संघर्ष को हर हाल में जारी रखेंगे।
केंद्रीय एजेंसियों और न्यायपालिका की भूमिका पर उठाए सवाल
देश में लोकतंत्र के "खतरे में" होने का दावा करते हुए CJP प्रमुख ने केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग पर हमला बोला। उन्होंने कहा:
विपक्षी दलों में टूट: ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) जैसे स्थापित राजनीतिक दलों को तोड़ने के लिए किया गया।
संवैधानिक संस्थाओं का दायित्व: देश की प्रमुख संस्थाओं का काम लोकतंत्र की रक्षा करना था, न कि किसी एक व्यक्ति की तानाशाही को बढ़ावा देना। उन्होंने आरोप लगाया कि इन संस्थाओं ने तानाशाही पनपने दी, जिसे रोकने के लिए अब आम जनता और विपक्ष को एक मंच पर आना होगा।
केंद्रीय मंत्रियों और शासन व्यवस्था पर तीखा प्रहार
दीपके ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और सरकार की नीतियों पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शासनकाल में अपराधियों और बलात्कारियों को संरक्षण दिया जा रहा है। राम रहीम जैसे मामलों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पैरोल पर अपराधियों का बाहर आना सरकार की प्राथमिकताओं और मंशा को उजागर करता है।





