भोपाल: भोपाल में आयोजित 'लोकतंत्र सेनानी प्रादेशिक सम्मेलन' को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है। आपातकाल (Emergency) के क्रूर दौर को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया और लोकतंत्र के सजग प्रहरियों के लिए कई ऐतिहासिक और कल्याणकारी घोषणाएं कीं।

26 जून को आयोजित इस भव्य सम्मेलन में सीएम मोहन यादव ने 96 वर्षीय लोकतंत्र सेनानी लक्ष्मी नारायण पाटीदार, 95 वर्षीय शांति लाल संघवी और पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता का मंच से भावपूर्ण अभिनंदन किया।

लोकतंत्र सेनानियों के लिए मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणाएं

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीसाबंदियों और लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान में घोषणाओं का पिटारा खोल दिया:

तीर्थाटन के लिए स्पेशल ट्रेन: लोकतंत्र सेनानियों के पवित्र स्थलों की यात्रा के लिए सरकार एक विशेष ट्रेन चलाएगी।

फ्री रेस्ट हाउस सुविधा: प्रदेशभर के सरकारी रेस्ट हाउस और सर्किट हाउस में लोकतंत्र सेनानी अब दो दिनों तक नि:शुल्क (Free) ठहर सकेंगे।

स्मृति में शिलालेख और नामकरण: दिवंगत लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान में उनके गांवों और कस्बों में शिलालेख स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही स्थानीय पार्कों, मार्गों और खेल के मैदानों का नामकरण भी उनके नाम पर होगा।

मुफ्त इलाज और एयर एंबुलेंस: सेनानियों के लिए नि:शुल्क चिकित्सा उपचार के साथ-साथ आपातकालीन स्थिति में एयर एंबुलेंस की सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी।

ताम्रपत्र का वितरण: जो लोकतंत्र सेनानी किन्हीं कारणों से ताम्रपत्र प्राप्त करने से वंचित रह गए थे, उन्हें बहुत जल्द ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।

"न तब सुधरी थी कांग्रेस, न अब सुधरी है"

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा देश के विकास और उसकी बुनियादी लड़ाई को रोकने का प्रयास किया। उन्होंने कहा:

"हमारे देश के आज़ाद होने के बाद दुनिया के कई अन्य राष्ट्र आज़ाद हुए। जापान तो द्वितीय विश्वयुद्ध में करीब-करीब पूरी तरह तबाह हो गया था, लेकिन सही नीतियों के कारण आज वह कहाँ पहुँच गया है और हमारा देश कहाँ खड़ा है। इंदिरा गांधी की आज चौथी पीढ़ी मैदान में है, लेकिन विचारधारा और नीति के मामले में कांग्रेस न तब सुधरी थी और न अब सुधरी है।"

आपातकाल का खौफनाक मंज़र: 'न वकील, न अपील, न दलील'

आपातकाल के दौरान परिवारों पर टूटे दुखों के पहाड़ को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह बेहद चुनौती भरा माहौल था। घर के मुखिया को बिना बताए सीधे जेल में बंद कर दिया जाता था। उस समय 'न वकील, न अपील, न दलील' की स्थिति थी।

उन्होंने बताया कि मीसाबंदियों (MISA) को प्रताड़ित कर कहा जाता था कि कांग्रेस में शामिल हो जाओ और इंदिरा गांधी की जय-जयकार करो तो छोड़ देंगे, लेकिन राष्ट्रभक्तों ने झुकना स्वीकार नहीं किया। लोकतंत्र सेनानियों की यह लड़ाई देश की स्वतंत्रता की पहली लड़ाई के समान ही पूजनीय है।

"संविधान हाथ में लेकर घूमने वाले किस मुंह से बात करते हैं?"

संविधान के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए सीएम मोहन यादव ने कहा कि आज कांग्रेसी हाथ में संविधान की किताब लेकर घूमते हैं, जबकि इतिहास गवाह है कि संविधान का सबसे ज्यादा दुरुपयोग उनकी पांच पीढ़ियों ने किया है। कांग्रेस ने केवल एक परिवार को आगे बढ़ाने के लिए बाकी पूरे देश और लोकतंत्र को दबाने का काम किया।

उन्होंने आगे जोड़ा कि कांग्रेस को देश पर शासन करने का एक बहुत लंबा समय मिला, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश को बदलने के लिए मात्र 10-12 साल का समय मिला है, जिसमें देश आज विश्व पटल पर विकास कर रहा है।

भावुक क्षण: जब मंच से गूंजी मीसाबंदी के बेटे की गूंज

कार्यक्रम के दौरान यह बात विशेष चर्चा में रही कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के पिता स्वयं एक मीसाबंदी रहे थे। उन्होंने बचपन से मीसाबंदियों की पीड़ा और उनके परिवारों के संघर्ष को बेहद करीब से देखा है।

इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष तपन भौमिक ने भी विचार व्यक्त किए और कहा कि यह प्रदेश का सौभाग्य है कि आज एक मीसाबंदी का बेटा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में नेतृत्व कर रहा है, जो इस दर्द और सम्मान को पूरी गहराई से समझता है।