नई दिल्ली। देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के भीतर एक बार फिर अंतर्कलह सतह पर आ गई है। इस बार विवाद का केंद्र कोई चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि दो दिग्गज बौद्धिक नेताओं— मणिशंकर अय्यर और शशि थरूर — के बीच छिड़ा 'खुला पत्र युद्ध' (Open Letter War) है। अय्यर ने जहाँ थरूर के स्टैंड को 'नैतिक भूल' बताया है, वहीं थरूर ने इन आरोपों को 'अनावश्यक और बेबुनियाद' करार दिया है।

विवाद की जड़: विदेश नीति और 'पापी युद्ध'

इस टकराव की शुरुआत तब हुई जब मणिशंकर अय्यर ने एक पत्रिका में थरूर के नाम एक तीखा खुला पत्र लिखा। अय्यर ने कहा कि एक टीवी कार्यक्रम के दौरान ईरान और इजरायल-अमेरिका संघर्ष पर थरूर के बयानों ने उन्हें 'अंदर तक हिला' दिया।

अय्यर का आरोप: थरूर ने परोक्ष रूप से 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' वाली नीति का समर्थन किया है। अय्यर के अनुसार, थरूर का यह कहना कि भारत को अमेरिका के खिलाफ सख्त रुख से बचना चाहिए क्योंकि अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है, एक 'नैतिक समर्पण' है।

थरूर का जवाब: थरूर ने पलटवार करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति की वास्तविकताओं को समझना और राष्ट्र हित को सर्वोपरि रखना 'जिम्मेदार शासन' की निशानी है, न कि सिद्धांतों से समझौता।

अय्यर का पछतावा: "थरूर को वोट देना राजनीतिक जोखिम था"

मणिशंकर अय्यर ने अपने पत्र में निजी टीस भी साझा की। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में उन्होंने थरूर का समर्थन कर अपना करियर दांव पर लगाया था। अय्यर ने लिखा:

"मुझे लगा था कि मैं एक आधुनिक और विद्वान व्यक्ति का साथ दे रहा हूँ, लेकिन अब मुझे लगता है कि मैंने गलत मुद्दे का समर्थन किया। थरूर अब पूरी तरह 'हम में से एक' नहीं रहे।"

अय्यर ने सबरीमाला मंदिर मुद्दे पर थरूर के पुराने स्टैंड और उनकी विदेश यात्राओं को लेकर भी उन पर निशाना साधा। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि अब उनके और थरूर के रास्ते पूरी तरह अलग हो चुके हैं।

थरूर का पलटवार: "चरित्र पर टिप्पणी अनुचित"

शशि थरूर ने भी खुले पत्र के जरिए अपना पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने अय्यर के आरोपों को खारिज करते हुए कहा:

देशभक्ति पर सवाल: विदेश नीति पर अलग सोच रखने का मतलब यह नहीं कि किसी सहयोगी की देशभक्ति या इरादों पर सवाल उठाया जाए।

विदेश यात्राएं: थरूर ने स्पष्ट किया कि उनकी अधिकांश यात्राएं निजी होती हैं और वे प्रधानमंत्री को खुश करने के लिए नहीं की जातीं।

सबरीमाला विवाद: उन्होंने हैरानी जताई कि अय्यर एक तरफ उनके विचारों की आलोचना करते हैं और दूसरी तरफ पार्टी के आधिकारिक रुख का समर्थन करने पर भी उन्हें घेरते हैं।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

पार्टी के दो बड़े स्तंभों के बीच इस तरह की सार्वजनिक बयानबाजी ने कांग्रेस नेतृत्व की मुश्किल बढ़ा दी है। जहाँ एक ओर मणिशंकर अय्यर अपनी कट्टर वैचारिक लाइन के लिए जाने जाते हैं, वहीं थरूर को एक व्यावहारिक और आधुनिक कूटनीतिज्ञ के रूप में देखा जाता है। इन दो विचारधाराओं के टकराव ने राज्यसभा चुनाव और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के बीच पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।