नई दिल्ली/बेंगलुरु: पूर्व प्रधानमंत्री और जेडी(एस) के वरिष्ठ नेता एच.डी. देवेगौड़ा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की 'शादी' वाली टिप्पणी पर कड़ा रुख अपनाते हुए पलटवार किया है। देवेगौड़ा ने कांग्रेस के साथ अपने पुराने रिश्तों को एक 'जबरन शादी' (Forced Marriage) करार दिया, जिसमें अंततः कड़वाहट और 'दुरुपयोग' के चलते तलाक की नौबत आ गई।

विवाद की जड़: खरगे का 'मजाकिया' कटाक्ष

हाल ही में संसद में मल्लिकार्जुन खरगे ने देवेगौड़ा की अनुपस्थिति में चुटकी लेते हुए कहा था कि "देवेगौड़ा जी पहले कांग्रेस से प्यार करते थे, लेकिन अब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा से शादी कर ली है।" उस वक्त देवेगौड़ा उगादी उत्सव के कारण सदन में मौजूद नहीं थे, लेकिन दिल्ली लौटते ही उन्होंने उसी अंदाज में जवाब दिया।

देवेगौड़ा का तीखा जवाब: "रिश्ता बन गया था बोझ"

देवेगौड़ा ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा:

"अगर खरगे जी शादी की भाषा में बात करना चाहते हैं, तो मैं कहूँगा कि कांग्रेस के साथ मेरा गठबंधन एक 'जबरन शादी' जैसा था। लेकिन मुझे उनसे तलाक लेना पड़ा क्योंकि वह रिश्ता पूरी तरह से 'Abusive' (दुरुपयोगपूर्ण) हो चुका था।"

उन्होंने साफ किया कि जेडी(एस) ने कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ा, बल्कि कांग्रेस के रवैये ने उन्हें एक स्थिर विकल्प (भाजपा) तलाशने पर मजबूर कर दिया।

2018 के घटनाक्रम का बड़ा खुलासा

देवेगौड़ा ने कर्नाटक की राजनीति के पुराने पन्ने पलटते हुए बताया कि 2018 में जब गठबंधन की बात हुई, तब उन्होंने खुद खरगे का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाया था।

प्रस्ताव: गुलाम नबी आजाद ने कुमारस्वामी को सीएम बनाने का प्रस्ताव दिया।

देवेगौड़ा की पसंद: उन्होंने सिद्धारमैया की मौजूदगी में स्पष्ट कहा था कि मल्लिकार्जुन खरगे को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए।

कांग्रेस की जिद: आजाद और कांग्रेस आलाकमान ने ही कुमारस्वामी पर मुख्यमंत्री बनने का दबाव बनाया था।

सरकार गिरने के लिए सिद्धारमैया पर निशाना

2019 में गठबंधन सरकार के पतन पर देवेगौड़ा ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की ओर इशारा करते हुए कहा कि कांग्रेस अपने विधायकों को भाजपा में जाने से नहीं रोक सकी।

"यह जगजाहिर है कि उन दलबदलियों को किसने हवा दी थी। अगर कांग्रेस नेतृत्व ने उस समय दलबदली कराने वालों पर कार्रवाई की होती, तो आज अध्यक्ष के रूप में खरगे जी की स्थिति और भी मजबूत होती।"

निष्कर्ष: नई राह और पुराना हिसाब

देवेगौड़ा के इस बयान ने कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर पुरानी रंजिशों को ताजा कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा के साथ उनका वर्तमान गठबंधन केवल राजनीतिक मजबूरी नहीं, बल्कि कांग्रेस के 'अस्थिर' व्यवहार का परिणाम है।