गुवाहाटी | असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के किलों में दरारें चौड़ी होती जा रही हैं। राज्य में पार्टी को उस वक्त एक और बड़ा झटका लगा, जब नागांव से दो बार के सांसद और पूर्व मंत्री प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार को अपने पद और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। पिछले तीन महीनों के भीतर कांग्रेस छोड़ने वाले वे पांचवें बड़े कद्दावर नेता हैं।
"पार्टी में महसूस हो रही थी घुटन"
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजे अपने त्यागपत्र में बोरदोलोई ने संगठन के कामकाज पर गहरे सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा:
"मैंने हमेशा राज्य के हित को सर्वोपरि रखा है। लेकिन यदि संगठन के भीतर मुझे घुटन महसूस होगी, तो मैं उस बाधा को हटाकर ऐसे माहौल की तलाश करूँगा जहाँ असम की प्रगति के लिए काम कर सकूँ।"
तीन महीने, पांच बड़े झटके: कांग्रेस का बदलता स्वरूप
असम में कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा ताश के पत्तों की तरह बिखरता नजर आ रहा है। पिछले 90 दिनों में इन दिग्गजों ने पार्टी को अलविदा कहा:
भूपेन कुमार बोराह (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष): फरवरी में पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। 30 साल का साथ छोड़ते समय उन्होंने संगठनात्मक निर्णयों से असंतोष जताया।
प्रद्युत बोरदोलोई (सांसद): नागांव सीट के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री।
रतुल कलिता (वरिष्ठ नेता): 7 मार्च को इस्तीफा देते हुए नेतृत्व पर 'परिवारवाद' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी में केवल 'नेताओं के बेटों' की सुनी जाती है।
अबुल मिया: धुबरी जिले के मजबूत स्तंभ, जो अब 'रायजोर दल' में शामिल हो चुके हैं।
रेजाउल करीम सरकार: अल्पसंख्यक राजनीति का बड़ा चेहरा, जिन्होंने शामिल होने के कुछ दिन बाद ही कांग्रेस छोड़ दी।
इस्तीफों के पीछे की 3 बड़ी वजहें
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, असम कांग्रेस में इस संकट के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
नेतृत्व पर अविश्वास: गौरव गोगोई और शीर्ष नेतृत्व पर जमीनी कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करने के आरोप लग रहे हैं।
अस्तित्व की लड़ाई: भूपेन बोराह जैसे नेताओं का भाजपा में जाना यह दर्शाता है कि सत्ताधारी दल का आकर्षण और कांग्रेस की कमजोर पकड़ नेताओं को भविष्य के प्रति असुरक्षित कर रही है।
वंशवाद बनाम कार्यकर्ता: साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले नेताओं (जैसे रतुल कलिता) का मानना है कि पार्टी में केवल राजनीतिक वारिसों को ही प्राथमिकता दी जा रही है।
चुनावी समीकरणों पर प्रभाव
| नेता | प्रभाव क्षेत्र | संभावित नुकसान |
|---|---|---|
| प्रद्युत बोरदोलोई | नागांव | मध्य असम में कांग्रेस का वोट बैंक प्रभावित होगा। |
| भूपेन बोराह | बिहपुरिया | संगठन की मजबूती और कैडर बेस पर सीधी चोट। |
| अबुल मिया | धुबरी | अल्पसंख्यक मतों का अन्य क्षेत्रीय दलों में बिखराव। |
असम में एक तरफ जहाँ भाजपा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है, वहीं कांग्रेस के लिए चुनाव से पहले अपने कुनबे को बचाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।





