लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार का दिन बड़े फेरबदल का गवाह बना। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राजभवन के गांधी सभागार में नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस कैबिनेट विस्तार के जरिए भाजपा ने न केवल सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है, बल्कि भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों के लिए अपनी टीम को और मजबूत किया है।
नए मंत्रियों की टीम: किसे मिली क्या जिम्मेदारी?
मंत्रिमंडल विस्तार में कुल 8 नए चेहरों और प्रमोटेड मंत्रियों को शामिल किया गया है:
कैबिनेट मंत्री: भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और एमएलसी भूपेंद्र सिंह चौधरी तथा ऊंचाहार से विधायक मनोज कुमार पांडेय ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली।
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार): योगी सरकार में पहले से मौजूद राज्यमंत्री अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर का कद बढ़ाते हुए उन्हें स्वतंत्र प्रभार की शपथ दिलाई गई।
राज्यमंत्री: कृष्णा पासवान (विधायक, खागा), सुरेंद्र दिलेर (विधायक, खैर), कैलाश सिंह राजपूत (विधायक, तिर्वा) और हंसराज विश्वकर्मा (एमएलसी) ने राज्यमंत्री के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली।
कैबिनेट का गणित: अब 54 सदस्यीय हुई योगी सरकार
इस विस्तार के बाद योगी आदित्यनाथ की मंत्रिपरिषद की कुल संख्या 54 हो गई है।
कैबिनेट मंत्री: 21
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार): 14
राज्यमंत्री: 18 (मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों सहित) संवैधानिक नियमों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिसका अर्थ है कि अभी भी 6 पद रिक्त हैं।
सामाजिक और जातीय समीकरणों पर फोकस
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विस्तार में भाजपा ने अपने कोर वोट बैंक और ओबीसी-एससी समीकरणों को संतुलित करने का प्रयास किया है।
ओबीसी और दलित प्रतिनिधित्व: शपथ लेने वाले मंत्रियों में ओबीसी और एससी वर्ग के चेहरों को प्रमुखता दी गई है।
विधायक दल का ढांचा: भाजपा के पास वर्तमान में विधानसभा में 84 ओबीसी, 59 एससी, 45 राजपूत और 42 ब्राह्मण विधायक हैं। मंत्रिमंडल में इन सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित कर आगामी चुनावों के लिए एक मजबूत संदेश दिया गया है।
शपथ ग्रहण के खास पल
शपथ ग्रहण के बाद गांधी सभागार 'भारत माता की जय' और 'जय श्रीराम' के नारों से गूंज उठा। इस अवसर पर केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, महामंत्री (संगठन) धर्मपाल और दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
निष्कर्ष: मार्च 2024 के विस्तार के बाद यह दूसरा बड़ा मौका है जब योगी सरकार ने अपनी टीम का विस्तार किया है। खास बात यह रही कि इस बार किसी भी मौजूदा मंत्री को हटाया नहीं गया, बल्कि नई प्रतिभाओं को जोड़कर सरकार की कार्यक्षमता और चुनावी संतुलन को बेहतर करने पर जोर दिया गया है।





