पटना:

बिहार की सियासत में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने की अटकलों ने सियासी पारा गरमा दिया है। इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी ने नीतीश कुमार की बदलती राजनीतिक दिशा पर बेहद तीखा और दार्शनिक तंज कसा है। शिवानंद तिवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक विस्तृत पोस्ट लिखकर नीतीश कुमार के अतीत और वर्तमान की तुलना की है।

उन्होंने याद दिलाया कि जो नीतीश कुमार कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में देखे जाते थे, आज उनका मोदी कैबिनेट का हिस्सा बनने की स्थिति में आना भारतीय राजनीति की एक बड़ी विडंबना है।

जब नरेंद्र मोदी की वजह से नीतीश ने रद्द कर दिया था 'भोज'

शिवानंद तिवारी ने अपने पोस्ट में साल 2010 के उस बहुचर्चित घटनाक्रम का जिक्र किया, जब भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक पटना में हुई थी। उन्होंने लिखा:

"नीतीश जी ने मुख्यमंत्री आवास में भाजपा नेताओं को भोज का न्योता दिया था। उन दिनों गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी भी इसमें शामिल होने वाले थे। लेकिन मोदी जी ने बिहार कोसी बाढ़ आपदा में गुजरात सरकार द्वारा दी गई आर्थिक सहायता के बड़े-बड़े होर्डिंग्स पटना में लगवा दिए। इस बात से नीतीश जी 'पिनक' (नाराज) गए। उन्होंने न सिर्फ गुजरात की सहायता राशि लौटाई, बल्कि नरेंद्र मोदी की उपस्थिति के डर से पूरा भोज ही रद्द कर दिया था। वहां से शुरू हुई राजनीतिक यात्रा आज इस मुकाम पर पहुँच गई है कि वही नीतीश कुमार अब नरेंद्र मोदी के घुटने छू रहे हैं।"

"मजाक में कहता था— तुम पीएम बने तो मैं गृह मंत्री बनूँगा"

नीतीश कुमार के साथ अपनी दशकों पुरानी दोस्ती को याद करते हुए राजद नेता ने एक पुराना वाकया भी साझा किया। उन्होंने लिखा कि उन दिनों जब भी देश की राजनीति की चर्चा होती थी, तो वे मज़ाक-मज़ाक में नीतीश से कहते थे, "यदि कभी तुम देश के प्रधानमंत्री बने, तो हमारे जैसा आदमी भी तुम्हारे मंत्रिमंडल में गृह मंत्री बनने की संभावना देख सकता है।"

तिवारी ने जदयू नेता विजय चौधरी के ताजा बयान का हवाला देते हुए कहा कि यदि नीतीश कुमार अब केंद्र सरकार में शामिल होते हैं, तो यह उनकी लंबी राजनीतिक यात्रा का 'अंतिम पड़ाव' जैसा प्रतीत होता है।

महात्मा गांधी के 'सात सामाजिक पाप' और सिद्धांतहीन राजनीति

नीतीश कुमार के बार-बार पाला बदलने की रणनीति पर सीधा प्रहार करते हुए शिवानंद तिवारी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गांधीजी ने जिन सात सामाजिक पापों का उल्लेख किया था, उनमें पहला पाप “सिद्धांतहीन राजनीति” है। पिछले 15-20 वर्षों के राजनीतिक घटनाक्रम को देखें तो नीतीश कुमार की राजनीति इसी श्रेणी में फिट बैठती है। जिस व्यक्ति ने पूरे देश में घूम-घूमकर नरेंद्र मोदी को सत्ता से हटाने के लिए विपक्षी गठबंधन का ताना-बाना बुना, आज वही उनके मंत्रिमंडल का हिस्सा बनने जा रहा है।

नीतीश की सियासी यात्रा: शिवानंद तिवारी के शब्दों में

दौर / समयनीतीश कुमार का राजनीतिक स्टैंड
वर्ष 2010पीएम मोदी के साथ पोस्टर में तस्वीर तक नहीं देखना चाहते थे; गुजरात की बाढ़ सहायता राशि लौटाई और भोज रद्द किया।
वर्ष 2023-24विपक्षी एकता की कमान संभाली और देश भर में घूमकर मोदी विरोधी मोर्चा तैयार किया।
वर्तमान (2026)एनडीए खेमे में वापसी के बाद अब नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल होने की मजबूत अटकलें।

शिवानंद तिवारी ने अंत में स्पष्ट किया कि भले ही उनके और नीतीश कुमार के राजनीतिक मतभेद रहे हों, लेकिन व्यक्तिगत संबंध हमेशा बने रहे हैं। उन्होंने अपने पुराने मित्र नीतीश कुमार के उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हुए इस पोस्ट को समाप्त किया, लेकिन उनके इस वैचारिक हमले ने बिहार से लेकर दिल्ली तक सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।