नई दिल्ली | लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देश की उभरती 'गिग इकोनॉमी' में काम करने वाले करोड़ों युवाओं के हितों को लेकर संसद में जोरदार आवाज उठाई है। हाल ही में गिग-वर्कर्स के एक समूह से मुलाकात कर उनकी जमीनी समस्याओं को समझने के बाद, राहुल गांधी ने सदन में उनके एक्सीडेंट, बीमा क्लेम और कार्यस्थल पर होने वाले भेदभाव को लेकर सरकार से जवाब माँगा। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने इन महत्वपूर्ण सवालों पर चुप्पी साध रखी है।
सदन में पूछे गए 5 प्रमुख सवाल
राहुल गांधी ने सरकार के सामने गिग-वर्कर्स की बदहाली से जुड़े निम्नलिखित बिंदु रखे:
न्यूनतम मजदूरी: क्या सरकार गिग-वर्कर्स के लिए कोई 'न्यूनतम मजदूरी' (Minimum Wage) सुनिश्चित करने की योजना बना रही है?
दुर्घटना और मृत्यु के आंकड़े: काम के दौरान होने वाले हादसों और मौतों की आधिकारिक संख्या क्या है?
बीमा क्लेम का सच: बीमा योजनाओं के तहत कितने क्लेम फाइल हुए, कितने स्वीकृत हुए और कितने खारिज किए गए?
भेदभाव और सुरक्षा: आईडी ब्लॉक करने की मनमानी, जाति-आधारित भेदभाव और महिला वर्कर्स की सुरक्षा के लिए क्या रूपरेखा है?
कॉर्पोरेट गुलामी: क्या ये वर्कर्स अर्थव्यवस्था के भागीदार बनेंगे या केवल 'कॉर्पोरेट गुलाम' बनकर रह जाएंगे?
नीति आयोग बनाम ई-श्रम पोर्टल: चौंकाने वाले आंकड़े
सदन में चर्चा के दौरान गिग-वर्कर्स के पंजीकरण और सुरक्षा योजनाओं की विफलता के आंकड़े भी सामने आए:
अनुमानित संख्या: नीति आयोग के अनुसार, जल्द ही भारत में गिग-वर्कर्स की संख्या 2 करोड़ के पार पहुँच जाएगी।
पंजीकरण की सुस्ती: विशाल संख्या के बावजूद eShram पोर्टल पर अब तक केवल 8.8 लाख वर्कर्स ही पंजीकृत हुए हैं।
बीमा योजनाओं की स्थिति: * प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) में मात्र 23,831 पंजीकरण।
प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) में आंकड़ा महज 1.3 लाख पर सिमटा है।
राहुल गांधी का प्रहार: "सरकार की चुप्पी यह दर्शाती है कि गिग-वर्कर्स का श्रम, सम्मान और सुरक्षा उनकी प्राथमिकता में नहीं है। बिना सामाजिक सुरक्षा के इस इकोनॉमी का विकास बेमानी है।"
विपक्ष का एकजुट रुख
उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा भी सदन में गिग-वर्कर्स के अधिकारों की वकालत कर चुके हैं। विपक्ष का सामूहिक तर्क है कि फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले इन युवाओं को 'पार्टनर' के नाम पर बुनियादी श्रम अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
गिग इकोनॉमी: एक नजर में
| श्रेणी | वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| अनुमानित वर्कफोर्स | ~2 करोड़ (भविष्य का लक्ष्य) |
| प्रमुख चुनौतियां | बीमा का अभाव, आईडी ब्लॉकिंग, आय में अनिश्चितता। |
| सरकारी योजनाएं | eShram, PMJJBY, PMSBY (कम पंजीकरण)। |





