चंडीगढ़: हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी होते ही प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है। भाजपा की किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल समाप्त होने से खाली हुई इन सीटों पर अब 'त्रिकोणीय' मुकाबला देखने को मिल रहा है। गुरुवार को भाजपा, कांग्रेस और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार ने अपने पर्चे दाखिल किए, जिससे 16 मार्च को होने वाले मतदान में किसी बड़े 'उलटफेर' की पटकथा तैयार होती दिख रही है।
मैदान में उतरे ये तीन चेहरे
संजय भाटिया (भाजपा): करनाल के पूर्व सांसद और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के करीबी माने जाने वाले भाटिया का पलड़ा भारी है।
कर्मवीर बौद्ध (कांग्रेस): पूर्व कर्मचारी नेता और हरियाणा सचिवालय से रिटायर हुए बौद्ध को कांग्रेस हाईकमान ने चौंकाने वाले फैसले के तहत मैदान में उतारा है।
सतीश नांदल (निर्दलीय - भाजपा समर्थित): पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ चुनाव लड़ चुके नांदल ने निर्दलीय ताल ठोककर कांग्रेस के समीकरण बिगाड़ दिए हैं।
नामांकन के दौरान शक्ति प्रदर्शन
भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया के साथ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडौली समेत दिग्गज नेता मौजूद रहे। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी कर्मवीर बौद्ध का नामांकन पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और रणदीप सुरजेवाला ने कराया। दिलचस्प बात यह रही कि सतीश नांदल के साथ तीन निर्दलीय विधायक—सावित्री जिंदल, राजेश जून और देवेंद्र कादियान—विधानसभा पहुंचे, जो भाजपा के रणनीतिक समर्थन का स्पष्ट संकेत है।
क्या फिर दोहराया जाएगा इतिहास?
हरियाणा में राज्यसभा चुनावों का इतिहास 'खेला' होने का रहा है। पिछले दो चुनावों में सुभाष चंद्रा और कार्तिकेय शर्मा ने निर्दलीय के तौर पर उतरकर भाजपा के समर्थन से जीत दर्ज की थी। इस बार भी गोपाल कांडा की जगह सतीश नांदल को आगे कर भाजपा ने वैसा ही चक्रव्यूह रचा है। विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पुराने प्रतिद्वंद्वी रहे नांदल इनेलो पृष्ठभूमि से हैं, जिससे उन्हें अभय चौटाला के विधायकों का समर्थन मिलने की भी संभावना है।
जीत का गणित: आंकड़ों की बाजीगरी
हरियाणा विधानसभा की 90 सीटों के आधार पर एक सीट जीतने के लिए 31 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता है।
विशेष नोट: कांग्रेस के पास जीत के लिए जरूरी 31 वोटों से 6 वोट अधिक हैं, लेकिन उम्मीदवार की कम लोकप्रियता और भाजपा की घेराबंदी कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकती है।
महत्वपूर्ण तिथियां
6 मार्च: नामांकन पत्रों की जांच।
9 मार्च: नाम वापसी का अंतिम दिन।
16 मार्च: मतदान और परिणाम।
वर्तमान में हरियाणा की सभी 5 राज्यसभा सीटों पर भाजपा या उसके समर्थित उम्मीदवारों का कब्जा है। यदि सतीश नांदल सेंधमारी करने में सफल रहते हैं, तो कांग्रेस के हाथ से यह सीट भी निकल सकती है। अब सबकी नजरें 16 मार्च को होने वाली वोटिंग और रणनीतिक 'जादूगरी' पर टिकी हैं।





