पटना:
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में एनडीए समर्थित बीजेपी (BJP) उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा की करारी हार और जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत के बाद एनडीए (NDA) के भीतर से ही सवाल उठने शुरू हो गए हैं। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने हार को लेकर बीजेपी को गंभीर आत्ममंथन और समीक्षा की नसीहत दी है।
श्याम रजक ने साफ तौर पर कहा कि यह हार चिंता का विषय है और जब तक बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की जवाबदेही तय कर जमीनी मूल्यांकन नहीं किया जाएगा, तब तक इस समस्या का समाधान संभव नहीं है।
"प्रचार की रणनीति और कोऑर्डिनेशन में हुई बड़ी चूक"
जेडीयू विधायक श्याम रजक ने हार के कारणों का विश्लेषण करते हुए चुनाव प्रबंधन की कमियों को उजागर किया:
कार्यकर्ताओं की सुस्ती: स्थानीय कार्यकर्ता धरातल पर सुस्त दिखे और मतदाताओं से सीधा संवाद कायम नहीं कर सके।
सिर्फ बड़े नेताओं का जमघट: चुनाव प्रचार केवल शीर्ष नेताओं के भाषणों और बैठकों तक सीमित रह गया, जबकि बूथ स्तर पर वोटरों को मतदान केंद्र तक पहुँचाने वाला कोई नहीं था।
खराब कोऑर्डिनेशन: किस इलाके में किस वर्ग के नेता का असर है और किसे कहाँ जिम्मेदारी दी जानी चाहिए, इसको लेकर रणनीतिक तालमेल (कोऑर्डिनेशन) की भारी कमी रही।
श्याम रजक का बयान: "एनडीए सरकार ने बांकीपुर में काफी काम किया था, लेकिन काम के आधार पर परिणाम नहीं मिल सका। जमीनी स्तर पर मतदाताओं को बूथ तक न ला पाना सबसे बड़ी नाकामी रही। एनडीए के सभी नेताओं को इस हार पर मिलकर आत्ममंथन करने की सख्त जरूरत है।"
अनंत सिंह का तंज: "जनता ही मालिक, कोई दुकान नहीं चला सकता"
दूसरी ओर, बांकीपुर में प्रशांत किशोर (PK) की धमाकेदार जीत पर मोकामा से विधायक अनंत सिंह ने अपने ठेठ अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असली ताकत सिर्फ और सिर्फ जनता के पास है।
अनंत सिंह की बेबाक टिप्पणी: "जनता ही मालिक है। उसने जिसको चाहा उसे जिता दिया, जिसको नहीं पसंद किया उसे हरा दिया। राजनीति कोई दुकान चलाने जैसी चीज नहीं है। जनता ही कुर्सी पर बैठाती है और वही उतार देती है। लोगों के बीच यह माहौल बन गया था कि बीजेपी ने जबरदस्ती नीतीश जी के साथ मिलकर ऐसा किया है, जिसका नतीजा अब सबके सामने है।"
एनडीए के लिए बड़ा झटका
दशकों से बीजेपी का गढ़ मानी जाने वाली बांकीपुर सीट पर इस करारी हार ने एनडीए खेमे में खलबली मचा दी है। जेडीयू नेता की इस तीखी प्रतिक्रिया के बाद अब बीजेपी के आंतरिक चुनाव प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।





