असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दर्ज कराए गए जालसाजी और मानहानि के मामले में फंसे पवन खेड़ा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। जहाँ बचाव पक्ष ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताते हुए गिरफ्तारी को अनावश्यक करार दिया, वहीं राज्य सरकार ने विदेशी ताकतों के साथ मिलीभगत और फर्जी दस्तावेजों के जरिए चुनाव प्रभावित करने की साजिश का गंभीर आरोप लगाते हुए हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
अदालत की कार्यवाही: मुख्य बिंदु
'बॉस के बॉस का बयान' और लोकतंत्र की दुहाई खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक है। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री के सार्वजनिक बयानों का हवाला देते हुए कहा कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति द्वारा "पूरी जिंदगी जेल में काटने" जैसी धमकी देना संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ है। सिंघवी ने कहा, "अगर डॉ. अंबेडकर आज जीवित होते, तो एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की ऐसी भाषा सुनकर व्यथित हो जाते।"
गिरफ्तारी की आवश्यकता पर सवाल बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि FIR में दर्ज अधिकांश धाराएं जमानती हैं। सिंघवी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक राजनेता को गिरफ्तार करने के लिए 50-60 जवानों का पहुंचना उसे अपमानित करने की कोशिश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खेड़ा कोई पेशेवर अपराधी नहीं हैं और वह जांच में सहयोग के लिए तैयार हैं, इसलिए हिरासत की कोई आवश्यकता नहीं है।
सॉलिसिटर जनरल के गंभीर आरोप: 'विदेशी हाथ' का संदेह असम सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने पीठ को बताया कि यह केवल मानहानि का साधारण मामला नहीं है, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक भारतीय नागरिक और सार्वजनिक व्यक्ति की छवि बिगाड़ने की गहरी साजिश है। SG ने दावा किया कि खेड़ा द्वारा दिखाए गए 'विदेशी पासपोर्ट' और 'अमेरिकी कंपनी के दस्तावेज' पूरी तरह फर्जी पाए गए हैं।
उन्होंने अदालत से कहा, "हमें यह जानना जरूरी है कि ये फर्जी दस्तावेज किसने बनाए और क्या इसमें कोई विदेशी ताकत शामिल है जो हमारे चुनावों में दखल देना चाहती है? इसके स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ अनिवार्य है।"
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब शुरू हुआ जब पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी, रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई देशों के पासपोर्ट हैं और उनके विदेशी वित्तीय हित हैं। इसके बाद उनके खिलाफ गुवाहाटी में धोखाधड़ी (धारा 318), जालसाजी (धारा 338/340) और मानहानि (धारा 356) सहित भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने पहले ही खेड़ा की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा था कि आरोपी अपने दावों को साबित करने वाले दस्तावेजों का स्रोत बताने में विफल रहा है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि कांग्रेस नेता को राहत मिलेगी या उन्हें असम पुलिस की जांच का सामना करना पड़ेगा।





