गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व प्रख्यात अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी के बीच छिड़ी जुबानी जंग ने अब एक गंभीर कानूनी और राजनीतिक संग्राम का रूप ले लिया है। मुख्यमंत्री सरमा ने सिंघवी पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपनी पत्नी के चरित्र हनन का आरोप लगाते हुए इसे एक लंबी कानूनी लड़ाई का आगाज़ करार दिया है।

मर्यादा का पाठ न पढ़ाएं सिंघवी: मुख्यमंत्री का कड़ा प्रहार

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया के माध्यम से सिंघवी पर सीधा हमला बोलते हुए स्पष्ट किया कि उन्हें लोकतंत्र या सार्वजनिक विमर्श पर किसी से सीख लेने की जरूरत नहीं है। सरमा ने इस विवाद के केंद्र में एक महिला के सम्मान और निजता का मुद्दा उठाया है।

मुख्यमंत्री के आरोपों के मुख्य बिंदु:

फर्जी दस्तावेजों का खेल: सरमा ने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए उनकी पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा को निशाना बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि दूसरे देशों के फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर राष्ट्रीय टेलीविजन पर एक ऐसी महिला का चरित्र हनन किया गया, जिसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।

न्यायपालिका पर भरोसा: मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए रची गई इस जालसाजी का अदालतें संज्ञान लेंगी। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में लिखा, "यह तो बस शुरुआत है, अंत नहीं।"

कार्यशैली पर सवाल: सरमा ने सिंघवी की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने उस मंच का उपयोग किया जहां वे जवाब देने के लिए मौजूद नहीं थे, जिसे निष्पक्ष बहस नहीं बल्कि संवाद से बचना कहा जाता है।

सिंघवी का पलटवार: 'यह सत्ता का दुरुपयोग और प्रतिशोध है'

दूसरी ओर, अभिषेक मनु सिंघवी ने पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत को 'कानूनी मर्यादा की जीत' बताते हुए सरकार की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है।

पारदर्शिता का दावा: सिंघवी ने कहा कि जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस को आधार बनाकर मानहानि का दावा किया गया, उसमें सभी दस्तावेज पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक पटल पर रखे गए थे।

उत्पीड़न का आरोप: वरिष्ठ अधिवक्ता के अनुसार, जब आरोपी जांच में सहयोग के लिए तैयार हो, तब गिरफ्तारी करना केवल राजनीतिक स्कोर सेट करने और विपक्षी नेताओं को अपमानित करने का एक जरिया है। उन्होंने इसे सत्ता का नंगा दुरुपयोग बताया।

"असली मुद्दा एक महिला से जुड़ा है। फर्जी दस्तावेजों के जरिए उसे निशाना बनाना नीचता की पराकाष्ठा है। छवि बिगाड़ने वालों को उनके दुस्साहस की सजा जरूर मिलेगी।"हिमंत बिस्वा सरमा, मुख्यमंत्री, असम

निष्कर्ष: अब अदालत की कार्यवाही पर टिकी निगाहें

जहाँ मुख्यमंत्री इसे एक महिला की गरिमा और सत्य की रक्षा की लड़ाई बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस इसे विपक्ष की आवाज दबाने की रणनीति मान रही है। यह विवाद अब केवल दो नेताओं के बीच का मतभेद नहीं रह गया है, बल्कि सार्वजनिक संवाद की मर्यादा और व्यक्तिगत निजता के बीच एक बड़ा कानूनी सवाल बन गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि न्यायपालिका इस 'हाई-प्रोफाइल' कानूनी जंग में क्या रुख अपनाती है।