नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से की गई 'बचत की अपील' पर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि जब देश की जनता महंगाई और आर्थिक संकट से जूझ रही है, तब प्रधानमंत्री उन्हें उपदेश दे रहे हैं। खरगे ने इसे सरकार की विफलताओं को छिपाने का प्रयास बताया है।
"पर उपदेश कुशल बहुतेरे": खरगे का तीखा प्रहार
मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री की आलोचना की। उनके बयान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
नाकामियों का ठीकरा: खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री अपनी 12 वर्षों की प्रशासनिक विफलताओं का बोझ जनता पर डाल रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा— "पर उपदेश कुशल बहुतेरे" (अर्थात सलाह देने में तो बहुत लोग माहिर होते हैं)।
देर से जागने का आरोप: खरगे के मुताबिक, जब 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हुआ था, तभी कांग्रेस ने गिरते रुपये, ईंधन की किल्लत और खाद्य सुरक्षा जैसे खतरों पर आगाह किया था, लेकिन तब पीएम चुनाव प्रचार और रोड शो में व्यस्त थे।
चुनावी टाइमिंग: उन्होंने सवाल उठाया कि जब तक चुनाव चल रहे थे, तब 'सब चंगा सी' कहा जा रहा था, लेकिन चुनाव खत्म होते ही बचत का पाठ पढ़ाया जाने लगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या की थी अपील?
रविवार (10 मई) को हैदराबाद में एक रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने वैश्विक परिस्थितियों के मद्देनजर देशवासियों से कुछ कड़े कदम उठाने और संयम बरतने का आग्रह किया था:
सोना और विदेश यात्रा: अगले एक साल तक सोना न खरीदने और विदेश यात्राओं में कमी करने का सुझाव।
ईंधन की बचत: पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करने की अपील।
Work From Home: ऊर्जा बचाने के लिए कोरोना काल की तरह 'वर्क फ्रॉम होम' और ऑनलाइन मीटिंग्स को फिर से प्राथमिकता देने की बात कही।
सियासी टकराव: पक्ष और विपक्ष के तर्क
| विषय | पीएम मोदी का स्टैंड (भाजपा) | मल्लिकार्जुन खरगे का स्टैंड (कांग्रेस) |
|---|---|---|
| वैश्विक संकट | खाड़ी देशों में तनाव और ग्लोबल एनर्जी प्रेशर के कारण संयम जरूरी है। | संकट की जानकारी पहले से थी, लेकिन सरकार चुनाव प्रचार में मश्गूल रही। |
| बचत की अपील | देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों से बचाने के लिए सामूहिक प्रयास। | जनता पहले ही गरीबी और महंगाई से त्रस्त है, यह अपील 'जख्मों पर नमक' जैसी है। |
| ईंधन और मुद्रा | अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति पर दबाव। | रुपये का गिरना और ईंधन के बढ़ते दाम सरकार की आर्थिक नीतियों की नाकामी है। |
'वर्क फ्रॉम होम' पर फिर चर्चा
प्रधानमंत्री ने तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल माध्यमों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम की जा सकती है। हालांकि, विपक्ष इसे मध्यम वर्ग और कर्मचारियों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव के रूप में देख रहा है। खरगे ने कहा कि बुनियादी समस्याओं (जैसे उर्वरक की कमी और MSME संकट) को हल करने के बजाय जनता को उपदेश देना संवेदनहीनता है।
निष्कर्ष:
प्रधानमंत्री की इस अपील ने आने वाले दिनों में और भी बड़े आर्थिक बदलावों के संकेत दे दिए हैं। जहाँ सरकार इसे वैश्विक संकट से निपटने की तैयारी बता रही है, वहीं विपक्ष इसे 2027 के चुनावों से पहले सरकार की कमजोर आर्थिक स्थिति का प्रमाण मान रहा है। अब देखना यह है कि जनता प्रधानमंत्री के इस 'संयम' के आह्वान को किस तरह अपनाती है।





