भोपाल।

मध्य प्रदेश की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एकतरफा और बड़ी राजनीतिक सफलता हासिल की है। गुरुवार को भाजपा के तीनों उम्मीदवार—तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट—निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए हैं।

विधानसभा परिसर में रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने तीनों नवनिर्वाचित सांसदों को निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंपकर उनकी जीत की औपचारिक घोषणा की। कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन निरस्त होने के बाद सूबे की राजनीति में भाजपा ने यह 'क्लीन स्वीप' की है।

क्यों नहीं आई मतदान की नौबत?

गुरुवार को दोपहर 3 बजे तक नाम वापसी की निर्धारित समय-सीमा तय थी। समय-सीमा समाप्त होने के बाद चुनावी मैदान में केवल तीन ही उम्मीदवार शेष बचे थे, जबकि रिक्त सीटों की संख्या भी तीन ही थी। ऐसी स्थिति में निर्वाचन प्रक्रिया के नियमों के तहत मतदान की आवश्यकता ही नहीं पड़ी और रिटर्निंग ऑफिसर ने तीनों भाजपा प्रत्याशियों को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया।

एक नज़र में पूरा समीकरण:

कुल सीटें: 03

मैदान में बचे उम्मीदवार: 03 (तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल, महेश केवट)

परिणाम: तीनों निर्विरोध निर्वाचित।

मीनाक्षी का नामांकन निरस्त होने से पलटा पूरा खेल

दरअसल, इस राज्यसभा चुनाव का पूरा परिदृश्य उस वक्त पूरी तरह बदल गया, जब स्क्रूटनी (जांच प्रक्रिया) के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया। मीनाक्षी का पर्चा खारिज होते ही भाजपा के तीनों उम्मीदवारों का रास्ता साफ हो गया था और आज नाम वापसी का समय बीतते ही इस पर अंतिम मुहर भी लग गई।

संख्याबल में थी टक्कर, पर कांग्रेस से हुई चूक

गौरतलब है कि विधानसभा में मौजूदा विधायकों की संख्या के हिसाब से राजनीतिक समीकरण 2 सीट भाजपा और 1 सीट कांग्रेस के पक्ष में दिखाई दे रहे थे। कांग्रेस ने इसी भरोसे के साथ अपनी मजबूत नेता मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा था। वहीं भाजपा ने अपने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग, प्रदेश के पूर्व प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल और पिछड़ा वर्ग के बड़े चेहरे महेश केवट पर दांव लगाया था। लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन रद्द होने से विपक्ष की उम्मीदों पर पानी फिर गया।

सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली तुरंत राहत

नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस ने इस फैसले के खिलाफ एड़ी-चोटी का जोर लगाया। पार्टी ने पहले केंद्रीय निर्वाचन आयोग (ECI) का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से कोई फैसला नहीं आया। इसके बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर तुरंत राहत की मांग की, लेकिन शीर्ष अदालत से भी पार्टी को तत्काल कोई फौरी राहत नहीं मिल सकी। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर कल (शुक्रवार को) सुनवाई करेगा, लेकिन तब तक भाजपा के तीनों नेता निर्विरोध निर्वाचित होकर सर्टिफिकेट हासिल कर चुके हैं।