भोपाल : मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब एक बड़े और खुले सियासी संग्राम में तब्दील हो चुकी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बीच शुरू हुई तनातनी के बाद अब पार्टी के तीन बेहद रसूखदार और वरिष्ठ नेताओं ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने एकजुट होकर दिल्ली दरबार (कांग्रेस हाईकमान) का दरवाजा खटखटाया है और दिग्विजय सिंह पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।

इस जबरदस्त घेराबंदी से मध्य प्रदेश कांग्रेस की पुरानी गुटबाजी एक बार फिर सरेआम उजागर हो गई है।

विवाद की वजह: ₹500 करोड़ की जमीन और 'अपनों' के अंतर्विरोध

इस पूरे सियासी बवंडर की शुरुआत उज्जैन की एक बेसकीमती जमीन को लेकर हुए आरोपों-प्रत्यारोपों से हुई:

जीतू पटवारी का हमला: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि उज्जैन के 'वीर भारत न्यास' को महज 1 रुपये के टोकन अमाउंट में 500 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन रेवड़ी की तरह दे दी गई।

दिग्विजय का बचाव पड़ा भारी: पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपनी ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के इस बड़े आरोप को सरेआम 'गलत' करार दे दिया। उन्होंने जीतू पटवारी के दावों को खारिज करते हुए न्यास का बचाव किया, जिसके बाद वे खुद अपनी ही पार्टी के नेताओं के निशाने पर आ गए।

हाईकमान से हस्तक्षेप की मांग: 'राजा साहब' पर तगड़ी घेराबंदी

जीतू पटवारी के समर्थन में उतरे तीनों बड़े नेताओं का रुख बेहद आक्रामक है:

1. अरुण यादव (पूर्व केंद्रीय मंत्री व पूर्व प्रदेशाध्यक्ष): इनका मानना है कि प्रदेश अध्यक्ष के स्टैंड का विरोध कर दिग्विजय सिंह ने अनुशासनहीनता की है, जिससे जनता के बीच गलत संदेश गया है। 2. सज्जन सिंह वर्मा (पूर्व कैबिनेट मंत्री): मालवा-निमाड़ की राजनीति के कद्दावर नेता सज्जन वर्मा ने भी दिग्विजय के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए दिल्ली से दखल देने की मांग की है। 3. निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी (प्रदेश महासचिव): बुंदेलखंड क्षेत्र से आने वाली निधि चतुर्वेदी ने भी इस मुहिम को मजबूत करते हुए केंद्रीय नेतृत्व को पत्र लिखकर कार्रवाई की बात कही है।

दिग्विजय की 'रहस्यमयी' चुप्पी, उमंग सिंघार की बंद कमरे में मुलाकात

इस पूरे विवाद और अपने खिलाफ हुई इतनी बड़ी घेराबंदी पर फिलहाल पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है। हालांकि, उनके समर्थक इस बात को लेकर गहरे असंतोष और नाराजगी में हैं।

इसी बीच, बुधवार देर शाम एक और बड़ी राजनीतिक हलचल देखने को मिली। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार अचानक दिग्विजय सिंह के भोपाल स्थित आवास पर पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में काफी देर तक गुप्त और गंभीर बातचीत हुई। इस मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में कयासों का बाजार गर्म है कि क्या उमंग सिंघार इस आग को शांत करने आए थे या फिर विधानसभा के भीतर कोई नया सियासी समीकरण बनने जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है: लोकसभा चुनाव की करारी हार के बाद एमपी कांग्रेस को एकजुट होकर खड़े होने की जरूरत थी, लेकिन इस नए भूचाल ने साबित कर दिया है कि राज्य में नेतृत्व की लड़ाई और 'अपनों की ही अपनों से जंग' कांग्रेस को एक बार फिर बैकफुट पर धकेल रही है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी इस विवाद पर क्या फैसला लेते हैं।