मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में महापुरुषों और ऐतिहासिक हस्तियों के नाम पर जारी घमासान एक नए मोड़ पर पहुँच गया है। छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना को लेकर शुरू हुए विवाद के बीच, प्रदेश कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। सावंत ने भाजपा पर 'सुविधा की राजनीति' और वोटों के ध्रुवीकरण के लिए इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का गंभीर आरोप लगाया है।

विवाद की जड़: तुलना और मुख्यमंत्री का पलटवार

यह पूरा विवाद तब भड़का जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने एक बयान में छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से कर दी। उन्होंने तर्क दिया कि दोनों ने ही अंग्रेजों के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया था।

भाजपा की प्रतिक्रिया: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस तुलना को पूरी तरह गलत बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को शिवाजी महाराज जैसे आराध्य देव की तुलना किसी और से करने पर 'शर्म आनी चाहिए'।

सचिन सावंत का 'एक्सपोज' कार्ड: भाजपा के पुराने फैसलों की सूची

मुख्यमंत्री के हमले के बाद सचिन सावंत ने भाजपा को उसके पुराने फैसलों और बयानों के आईने में खड़ा किया। उन्होंने कई उदाहरण पेश करते हुए भाजपा को उसके 'दोहरे मापदंड' पर घेरा:

वर्षस्थान/संदर्भभाजपा का कथित कदम
2001अंधेरी वेस्ट, मुंबईपूर्व सांसद गोपाल शेट्टी और भाजपा पार्षदों ने 'टीपू सुल्तान मार्ग' का प्रस्ताव दिया था।
2012अकोला नगर निगमभाजपा नेता विजय अग्रवाल ने एक हॉल का नाम टीपू सुल्तान के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा।
2013एम-ईस्ट वार्ड, मुंबईभाजपा पार्षदों ने एक सड़क का नाम टीपू सुल्तान के नाम पर रखने का समर्थन किया था।
2017कर्नाटक विधानसभातत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने भाषण में टीपू सुल्तान की सराहना की थी।

सावंत ने यह भी दावा किया कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने टीपू सुल्तान की मजार पर जाकर उनकी तारीफ की थी। उन्होंने कहा कि टीपू सुल्तान भगवान राम के नाम वाली अंगूठी पहनते थे, लेकिन भाजपा अब केवल चुनावी फायदे के लिए उन्हें निशाना बना रही है।

ध्रुवीकरण बनाम इतिहास

कांग्रेस नेता का आरोप है कि भाजपा अब समाज को बांटने और वोटों के ध्रुवीकरण के लिए टीपू सुल्तान को 'खलनायक' के रूप में पेश कर रही है, जबकि अतीत में उसके अपने नेताओं ने उनकी प्रशंसा की थी। मालेगांव नगर निगम में टीपू सुल्तान की तस्वीर को लेकर हुआ हालिया विवाद भी इसी राजनीतिक खींचतान का हिस्सा माना जा रहा है।

निष्कर्ष: टीपू सुल्तान के व्यक्तित्व को लेकर इतिहासकार बंटे हुए हैं—जहाँ एक पक्ष उन्हें अंग्रेजों से लोहा लेने वाला योद्धा मानता है, वहीं दूसरा पक्ष उन पर कट्टरता का आरोप लगाता है। लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में यह अब इतिहास से ज्यादा 'वोट बैंक' का मुद्दा बन चुका है।