विशेष संवाददाता

पटना/नई दिल्ली: नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में चला छात्रों का आंदोलन भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन अब इस पर सियासी बयानबाजी और साइड इफेक्ट्स खुलकर सामने आने लगे हैं। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक बड़ी अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय साजिश होने का सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मासूम छात्रों का इस्तेमाल देश में सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और अस्थिरता पैदा करने के लिए किया गया।

"छात्र बने साजिश का शिकार, पाकिस्तान से जुड़े तार"

पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि वह इस मामले में शुरुआत से ही साजिश की बात कह रहे थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर फैलाई गई गतिविधियों और नैरेटिव के तार पाकिस्तान से जुड़े हुए पाए गए हैं।

"इस पूरे घटनाक्रम के पीछे बाहरी असामाजिक तत्वों की भूमिका थी। इसका मुख्य उद्देश्य देश की शांति व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना, लोगों में विभाजन पैदा करना और भारत को अस्थिर करना था। सरकार ने समय रहते मामले की गंभीरता को समझा और स्थिति को नियंत्रण में लिया।"

रामकृपाल यादव, बीजेपी नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और भाषाई मर्यादा पर सवाल

धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए रामकृपाल यादव ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री के समक्ष स्वेच्छा से इस्तीफा सौंपा, जिससे स्थिति को शांत करने में मदद मिली। अब आंदोलन कर रहे छात्रों को भी धीरे-धीरे समझ आ रहा है कि पर्दे के पीछे से क्या खेल खेला जा रहा था।

इसके साथ ही उन्होंने आंदोलन के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा पर कड़ी आपत्ति जताई:

लोकतांत्रिक दायरा: किसी भी जायज़ मांग को लोकतांत्रिक और मर्यादित तरीके से ही रखा जाना चाहिए।

अशोभनीय टिप्पणी: कुछ असामाजिक तत्वों ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री के खिलाफ बेहद अभद्र और अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

तेज प्रताप यादव और जन सुराज पर साधा निशाना

राजनीतिक हलचल पर बात करते हुए रामकृपाल यादव ने तेज प्रताप यादव और प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी:

तेज प्रताप यादव: उन्होंने कहा कि तेज प्रताप की नई पार्टी के उम्मीदवार का नामांकन तकनीकी और व्यक्तिगत कारणों से रद्द हुआ था, इसमें सरकार का कोई लेना-देना नहीं है।

जन सुराज पार्टी: जन सुराज पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि कुछ नेता केवल राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए प्रतिबंधित क्षेत्रों में पहुंचे और हंगामा करने वालों के साथ शामिल हो गए। पुलिस ने शुरुआती छूट दी थी, लेकिन कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर नियमानुसार कार्रवाई करनी पड़ी।

रामकृपाल यादव के इन गंभीर आरोपों के बाद बिहार और देश की राजनीति में एक नया भूचाल आ गया है, जिस पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया आनी बाकी है।