चित्तौड़गढ़ / जयपुर: राजस्थान की सियासत में उस समय हड़कंप मच गया जब भजनलाल सरकार के सहकारिता मंत्री गौतम दक का एक बेहद चौंकाने वाला और विवादित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस वायरल ऑडियो में मंत्री जी चित्तौड़गढ़ जिले के डूंगला थाने में तैनात पुलिसकर्मियों के साथ सरेआम अभद्रता करते, धमकाते और बेहद भद्दी गालियां देते हुए सुनाई दे रहे हैं। इस घटना के सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छिड़ गई है।

3 मिनट में 17 बार गालियां, सफाई का मौका तक नहीं

यह पूरी घटना सोमवार (25 मई) की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, मंत्री गौतम दक डूंगला थाने पहुंचे थे, जहां उन्होंने थानाधिकारी (SHO) शैतान सिंह और कांस्टेबल लक्ष्मीनारायण व विष्णु को बाहर बुलाया। इसके बाद शुरू हुआ विवादित बातचीत का सिलसिला सोशल मीडिया पर तैर रही 3 मिनट की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में कैद हो गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंत्री जी ने बातचीत की शुरुआत ही अपशब्दों से की और महज 3 मिनट के भीतर पुलिसकर्मियों को 17 बार भद्दी गालियां दीं। मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने इस पूरे वाकये को अपने फोन में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है।

आखिर क्यों खोया मंत्री जी ने आपा?

दरअसल, मंत्री गौतम दक के इस कदर आगबबूला होने के पीछे उनके एक राजनीतिक कार्यकर्ता से जुड़ा मामला था। मंत्री का आरोप था कि उक्त पुलिसकर्मियों ने उनके एक कार्यकर्ता के घर जाकर उसे न केवल बेवजह धमकाया, बल्कि उससे अवैध वसूली (पैसे की मांग) भी की। इसी बात से नाराज होकर मंत्री खुद थाने पहुंच गए थे।

'यहीं इलाज करेंगे...' — ऑडियो में दी खुली धमकी

वायरल हो रहे ऑडियो में सहकारिता मंत्री बेहद आक्रामक लहजे में पुलिसकर्मियों को अपनी धौंस दिखाते नजर आ रहे हैं। उन्होंने पुलिसकर्मियों को अपनी सफाई में कुछ भी बोलने का मौका दिए बिना कहा:

"तेरी...! इनके भरोसे मत रहना तू। यहां ये सब मेरे को पसंद नहीं है। मैंने तेरे को कहा था मेरे जानकार के तूने लठ्ठ क्यों लगाए? पुलिस होने पर शर्म आएगी तेरे को। किसी खुमारी में मत रहना... एक भी आदमी से पैसे मांगे और मुझे पता चल गया तो यहीं इलाज करेंगे... नौकरी खराब करना मेरे को भी आता है।"

राजनीतिक हलकों में मचा बवाल

हालांकि, भ्रष्टाचार या अवैध वसूली की शिकायत पर एक जनप्रतिनिधि का गुस्सा होना स्वाभाविक माना जा सकता है, लेकिन संवैधानिक और जिम्मेदार 'मंत्री पद' पर बैठे व्यक्ति द्वारा सरेआम कानून के रखवालों को इस तरह की भद्दी गालियां देना और धमकी देना मर्यादित नहीं माना जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल मामले के बाद अब विपक्ष को भी सरकार को घेरने का एक बड़ा मुद्दा मिल गया है।