नई दिल्ली/भोपाल:
मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में एक अप्रत्याशित और नाटकीय मोड़ आ गया है। कांग्रेस की एकमात्र उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद पार्टी ने आपातकालीन कदम उठाते हुए 'प्लान बी' के तहत आधी रात को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी की याचिका पर गुरुवार सुबह अवकाशकालीन पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई होने की उम्मीद है।
क्यों खारिज हुआ नामांकन?
यह पूरा विवाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा उठाई गई एक आपत्ति के बाद शुरू हुआ। सत्ताधारी दल ने दावा किया था कि कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन पत्र के साथ दिए गए हलफनामे में तेलंगाना में चल रहे एक कानूनी मामले की जानकारी छुपाई है। भाजपा की इस आपत्ति को संज्ञान में लेते हुए रिटर्निंग ऑफिसर (RO) ने नटराजन का नामांकन पत्र रद्द कर दिया।
कांग्रेस का कड़ा ऐतराज: "यह एक राजनीतिक साजिश है"
कांग्रेस पार्टी और मीनाक्षी नटराजन ने इस फैसले को पूरी तरह से गैरकानूनी और राजनीति से प्रेरित बताया है। पार्टी ने चुनाव अधिकारी की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
मिलीभगत का आरोप: मीनाक्षी नटराजन ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि रिटर्निंग ऑफिसर भ्रष्ट हैं और सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैं पूरी जिम्मेदारी से कह सकती हूं कि चुनाव अधिकारी मौजूदा सरकार के मुखपत्र के रूप में काम कर रहे थे।"
आपराधिक मामले का खंडन: कांग्रेस का स्पष्ट कहना है कि मीनाक्षी के खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है। पार्टी के अनुसार, मामला केवल एक निजी शिकायत से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने अब तक संज्ञान (Cognizance) तक नहीं लिया है।
चुनाव आयोग के दरबार में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व
इस झटके के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी के नेतृत्व में पार्टी के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में चुनाव आयोग (Election Commission) के अधिकारियों से मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "निर्वाचन अधिकारी का यह निर्णय पूरी तरह विकृत और कानूनी रूप से गलत है। जिस आधार पर नामांकन खारिज किया गया है, उसका कानून में कोई अस्तित्व ही नहीं है। जब तक मजिस्ट्रेट मामले पर संज्ञान नहीं लेते, कोई आपराधिक मुकदमा शुरू ही नहीं होता।"
कांग्रेस के सामने क्या है असली संकट?
इस घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश कांग्रेस को अधर में लटका दिया है। मीनाक्षी नटराजन राज्य से पार्टी की इकलौती उम्मीदवार थीं। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून को ही समाप्त हो चुकी है। समय सीमा बीत जाने के कारण कांग्रेस अब किसी दूसरे उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतार सकती।
अब कांग्रेस के लिए राज्यसभा पहुंचने का एकमात्र रास्ता सुप्रीम कोर्ट या चुनाव आयोग के हस्तक्षेप से ही खुल सकता है। सभी की निगाहें अब अदालत के फैसले और चुनाव आयोग के रुख पर टिकी हैं।





