रांची:

लद्दाख के प्रमुख सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन से उठाए जाने और अस्पताल में भर्ती कराए जाने के मामले ने अब झारखंड की सियासत में एक बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। राज्य की सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और कांग्रेस ने इसे केंद्र सरकार का 'तानाशाही रवैया' करार दिया है, तो वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे स्वास्थ्य कारणों से उठाया गया जरूरी कदम बताते हुए राज्य सरकार को स्थानीय मुद्दों पर घेरा है।

'यह तानाशाही एटीट्यूड है, देश का युवा शर्मिंदा है' — कांग्रेस व जेएमएम

झारखंड सरकार के मंत्रियों और सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं ने केंद्र सरकार पर संवैधानिक मूल्यों को खत्म करने का संगीन आरोप लगाया है।

राधाकृष्ण किशोर (वित्त मंत्री, झारखंड): केंद्र पर सीधा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा, "बीजेपी की केंद्र सरकार भारतीय संविधान के मूल्यों के खिलाफ काम कर रही है। मैं तो एक तरह से कह सकता हूं कि यह जो एटीट्यूड है, वो पूरी तरह तानाशाह वाला एटीट्यूड है। वो जो चाहेंगे वही करेंगे, लोकतांत्रिक देश में ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए।"

इरफान अंसारी (स्वास्थ्य मंत्री, झारखंड): उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "सोनम वांगचुक जी को जिस तरह से दिल्ली पुलिस उठाकर ले गई, उससे आज हिंदुस्तान का एक-एक युवा खुद को बेहद शर्मिंदा महसूस कर रहा है।"

सत्तारूढ़ जेएमएम का रुख: पार्टी ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत बताया है। जेएमएम ने याद दिलाया कि देश के इतिहास में महात्मा गांधी से लेकर अन्ना हजारे तक ने अपनी मांगों के लिए अनशन का सहारा लिया है। ऐसे में किसी प्रदर्शनकारी को बलपूर्वक हटाना स्वस्थ लोकतंत्र के संकेत नहीं हैं।

'स्वास्थ्य के लिए जरूरी था कदम, मंच का हो रहा था दुरुपयोग' — बीजेपी की दलील

झारखंड बीजेपी ने दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई का पुरजोर समर्थन करते हुए विपक्षी दलों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। बीजेपी ने इसके पीछे दो मुख्य तर्क दिए:

बिगड़ता स्वास्थ्य: अनशन के चलते सोनम वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही थी। एक नागरिक की जान बचाना प्रशासन की प्राथमिकता है, इसलिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पूरी तरह नियमसंगत और जायज था।

आंदोलन का राजनीतिकरण: बीजेपी का आरोप है कि आंदोलन जिस मूल मकसद से शुरू हुआ था, अब उसका स्वरूप बदल चुका था। कई विपक्षी दल इस मंच का दुरुपयोग करके आस्था और भगवान राम के नाम पर बेवजह विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे।

'दूसरों पर उंगली उठाने वाले अपने गिरेबान में झांकें' — केंद्रीय मंत्री संजय सेठ

रांची के सांसद और केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने जेएमएम और कांग्रेस गठबंधन पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि दूसरों को नसीहत देने से पहले राज्य सरकार को झारखंड की बदहाली देखनी चाहिए।

संजय सेठ का राज्य सरकार पर हमला:

"दूसरों पर उंगली उठाने से पहले जेएमएम सरकार अपने गिरेबान में झांके। झारखंड में आज होमगार्ड की बेटियां तड़प रही हैं, उन्हें पिछले 5 महीने से वेतन नहीं मिला है। इसके अलावा राज्य के 21,000 शिक्षकों को भी वेतन के लिए तरसाया जा रहा है, लेकिन राज्य सरकार का ध्यान इन गंभीर जनसमस्याओं पर नहीं है।"

सियासी घमासान के मुख्य बिंदु:

पक्षमुख्य आरोप / दलील
सत्तापक्ष (JMM + Congress)

• शांतिपूर्ण अनशन को बलपूर्वक दबाना पूरी तरह तानाशाही है।


• केंद्र सरकार लोकतांत्रिक अवधारणा को खत्म कर रही है।

विपक्ष (BJP)

• वांगचुक को हटाना एक मेडिकल इमरजेंसी और सुरक्षा से जुड़ा फैसला था।


• झारखंड सरकार अपनी विफलताओं (शिक्षकों और होमगार्ड्स का वेतन न देना) को छुपाने के लिए इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है।

निष्कर्ष: दिल्ली के जंतर-मंतर से उठी चिंगारी ने झारखंड की राजनीतिक तपिश को चरम पर पहुंचा दिया है। आगामी राजनीतिक समीकरणों के बीच, यह मुद्दा राज्य के स्थानीय बनाम राष्ट्रीय विमर्श की जंग में तब्दील होता नजर आ रहा है।