हरिद्वार: उत्तराखंड की राजनीति में 'मिशन 2027' की बिसात बिछ चुकी है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य के मैदानी द्वार हरिद्वार से अपने चुनावी अभियान का जोरदार आगाज कर दिया है। शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने धर्मनगरी में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्ष के खिलाफ हुंकार भरी। लगातार तीसरी बार सत्ता पर काबिज होने के लक्ष्य के साथ भाजपा ने अपनी रणनीति के केंद्र में उन क्षेत्रों को रखा है, जहाँ पिछला प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था।
हरिद्वार ही क्यों? रणनीति के पीछे के तीन बड़े कारण
सियासी गलियारों में चर्चा है कि शाह ने अपनी रैली के लिए हरिद्वार को ही क्यों चुना। इसके पीछे तीन ठोस रणनीतिक कारण माने जा रहे हैं:
2022 की कसक मिटाना: पिछले विधानसभा चुनाव में हरिद्वार जिले की 11 सीटों में से भाजपा के खाते में केवल 3 सीटें (हरिद्वार, भेल रानीपुर, रुड़की) ही आई थीं। शेष सीटों पर कांग्रेस, बसपा और निर्दलीयों का कब्जा रहा। शाह का यह दौरा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरके इस 'गढ़' को फिर से भगवा रंग में रंगने की कवायद है।
हिंदुत्व और सांस्कृतिक चेतना: हरिद्वार से निकलने वाला कोई भी संदेश न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश की धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को प्रभावित करता है। भाजपा यहाँ से अपनी वैचारिक पकड़ मजबूत करना चाहती है।
मैदानी समीकरणों को साधना: उत्तराखंड की सत्ता की राह हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी जिलों से होकर गुजरती है। इन क्षेत्रों में विपक्षी दलों की मजबूत पैठ को तोड़ना भाजपा की शीर्ष प्राथमिकता है।
धामी सरकार के 'कड़े फैसलों' पर मुहर
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के सफल चार साल पूरे होने का जश्न मनाया जा रहा है। जनसभा के माध्यम से भाजपा ने अपने कड़े और प्रभावी कानूनों को जनता के सामने ढाल के रूप में पेश किया:
समान नागरिक संहिता (UCC) और सख्त धर्मांतरण कानून।
नकलरोधी कानून और दंगारोधी कानून।
केंद्र के तीन नए कानून और डबल इंजन सरकार की विकास यात्रा।
शाह ने स्पष्ट संदेश दिया कि विकास की राह में कितनी ही अड़चनें आएं, डबल इंजन की ताकत के सामने सब छोटी हैं।
टोली बैठक: जीत का 'चाणक्य सूत्र'
जनसभा के बाद एक निजी होटल में भाजपा के 'कोर ग्रुप' की महत्वपूर्ण टोली बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित 14 प्रमुख सदस्य शामिल हुए। माना जा रहा है कि अमित शाह ने इस क्लोज-डोर मीटिंग में सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) को मात देने और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने के 'गुरुमंत्र' साझा किए हैं।
बैठक में शामिल प्रमुख चेहरे:
संगठन: महेंद्र भट्ट (प्रदेश अध्यक्ष), अजय कुमार (महामंत्री संगठन)।
सरकार: सीएम पुष्कर सिंह धामी, सतपाल महाराज, धन सिंह रावत, सुबोध उनियाल, रेखा आर्य।
दिग्गज: विजय बहुगुणा, तीरथ सिंह रावत, मदन कौशिक।





