कोलकाता | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की सरगर्मी के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने राज्य की सियासत में एक बड़ा बयान देकर भविष्य की तस्वीर साफ करने की कोशिश की है। घोष ने दावा किया है कि ममता बनर्जी के उत्तराधिकारी के रूप में अभिषेक बनर्जी पूरी तरह तैयार हैं और वह 2036 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे।
"इमोशन और मॉडर्न मैनेजमेंट का संगम"
कुणाल घोष ने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक 'आधुनिक विजन' वाला नेता बताया। उन्होंने कहा कि अभिषेक ने पिछले कुछ वर्षों में खुद को मुख्यमंत्री पद के लिए बेहद संजीदगी से तैयार किया है।
कॉर्पोरेट स्टाइल वर्किंग: एमबीए (MBA) बैकग्राउंड वाले अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के पुराने ढांचे में 'डेटा एनालिटिक्स' और 'साइंटिफिक कैंपेनिंग' को शामिल किया है।
अनुशासन: 28 साल पुरानी पार्टी होने के बावजूद आज टीएमसी का कैडर जो 'डिसिप्लिन' दिखा रहा है, उसका श्रेय कुणाल घोष ने अभिषेक की लीडरशिप को दिया।
टिकट बंटवारे में 'अभिषेक इम्पैक्ट'
पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी की बढ़ती ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब उम्मीदवारों का चयन केवल भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि बूथ-बेस्ड सर्वे और प्रोफेशनल एजेंसियों की रिपोर्ट पर हो रहा है।
"वे उस नई राजनैतिक संस्कृति के वास्तुकार (Architect) हैं, जहाँ उम्मीदवार की लोकप्रियता और जमीनी डेटा ही टिकट का आधार बनता है।"
ममता-अभिषेक की जोड़ी: 5 पीढ़ियों का साथ
कुणाल घोष ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की जोड़ी मिलकर पार्टी चला रही है, जिसमें चार से पांच पीढ़ियों के कार्यकर्ता एक साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा:
"ममता बनर्जी के पास अनुभव और जनमत का अथाह भंडार है, जबकि अभिषेक अपनी उपलब्धियों के साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं। अब दीवार पर लिख लीजिए, अभिषेक बनर्जी ज्यादा से ज्यादा 2036 में मुख्यमंत्री बनेंगे।"
सियासी मायने
अभिषेक बनर्जी वर्तमान में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव हैं और पार्टी के शीर्ष चुनाव प्रचारकों में शुमार हैं। कुणाल घोष का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार 'परिवारवाद' के मुद्दे पर हमलावर है। हालांकि, घोष के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि टीएमसी के भीतर भविष्य के नेतृत्व को लेकर अब कोई संशय नहीं है।
क्या आप जानना चाहेंगे कि अभिषेक बनर्जी की इस 'मॉडर्न मैनेजमेंट' रणनीति का बंगाल के आगामी चरणों के चुनावों पर क्या असर पड़ सकता है?





