भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में राज्यसभा चुनाव को लेकर अचानक हलचल तेज हो गई है। दो सीटों पर मजबूत पकड़ रखने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ऐन वक्त पर अपना तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारकर मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है। बीजेपी ने मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष और केवट समाज के बड़े चेहरे महेश केवट को अपना तीसरा प्रत्याशी बनाया है। सोमवार (9 जून) को मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में केवट के नामांकन दाखिल करते ही कांग्रेस खेमे में खलबली मच गई है।

बीजेपी के इस कदम से कांग्रेस को अपने विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग किए जाने का डर सताने लगा है। यही वजह है कि पार्टी कोई जोखिम न लेते हुए अपने विधायकों को कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक शिफ्ट करने की तैयारी में है।

क्या है विधानसभा का जादुई गणित?

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की 3 सीटों के लिए चुनाव होना है। पहले संख्या बल के हिसाब से 2 सीटों पर बीजेपी और 1 सीट पर कांग्रेस की जीत तय मानी जा रही थी, लेकिन बीजेपी के तीसरे दांव ने समीकरण बदल दिए हैं:

कांग्रेस की स्थिति: कांग्रेस के पास वर्तमान में 62 वोट हैं, जबकि एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की आवश्यकता है। आंकड़े के लिहाज से कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन सुरक्षित हैं, बशर्ते पार्टी में कोई टूट न हो।

बीजेपी की रणनीति: बीजेपी ने तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल के रूप में दो उम्मीदवार पहले ही उतारे थे। अब तीसरी सीट के लिए महेश केवट को जिताने के लिए पार्टी को केवल 8 अतिरिक्त वोटों की दरकार है। बीजेपी को भरोसा है कि वह निर्दलीयों, अन्य दलों और कांग्रेस में सेंधमारी (क्रॉस वोटिंग) के जरिए यह आंकड़ा हासिल कर लेगी।

बाड़ेबंदी की तैयारी: विशेष विमान से कर्नाटक जाएंगे कांग्रेस विधायक

सूत्रों के मुताबिक, क्रॉस वोटिंग के खतरे को देखते हुए कांग्रेस अपने विधायकों की किलेबंदी में जुट गई है। मंगलवार (9 जून) दोपहर 12 बजे सभी कांग्रेसी विधायकों को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बंगले पर तलब किया गया है। यहाँ से उन्हें विशेष विमान के जरिए बेंगलुरु (कर्नाटक) भेजा जा सकता है। विधायकों को अपने परिवार के सदस्यों को साथ ले जाने की अनुमति दी गई है, हालांकि स्टाफ को साथ ले जाने पर पाबंदी रहेगी।

कौन हैं महेश केवट? जमीन से राष्ट्रीय मंच तक का सफर

बीजेपी ने महेश केवट को टिकट देकर बुंदेलखंड में क्षेत्रीय और सामाजिक (मछुआरा समुदाय) समीकरणों को पूरी तरह अपने पाले में करने की चाल चली है। केवट का राजनीतिक सफर बेहद जमीनी रहा है:

आरएसएस से शुरुआत: वह 1984 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े हैं और ओरछा शाखा में मुख्य शिक्षक रह चुके हैं। छात्र राजनीति में वह एबीवीपी (ABVP) के ब्लॉक संयोजक और बाद में विहिप (VHP) की निवाड़ी इकाई में सचिव रहे।

सक्रिय राजनीति: 1995 से बीजेपी की सक्रिय राजनीति में हैं। वह ओरछा नगर परिषद के उपाध्यक्ष और पार्षद भी रह चुके हैं। संगठन में उन्होंने जिला मंत्री, जिला उपाध्यक्ष और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के रूप में काम किया है। इसके अलावा हरियाणा चुनाव और प्रदेश के कई विधानसभा उपचुनावों में उन्होंने अहम सांगठनिक भूमिकाएं निभाई हैं।

"हम तीनों सीटें जीतकर रहेंगे" महेश केवट के नामांकन के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जीत का दावा करते हुए कहा, "भविष्य में हम अपनी तीनों राज्यसभा सीटों से निर्वाचित होकर रहेंगे। पीएम नरेंद्र मोदी और हमारी पार्टी जो कहती है, वह करके दिखाती है। बीजेपी ने उच्च सदन में केवट समाज को प्रतिनिधित्व देकर सभी वर्गों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है।" वहीं, प्रत्याशी महेश केवट ने इस बड़ी जिम्मेदारी के लिए शीर्ष नेतृत्व का आभार जताया है।

अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस अपने 62 वोटों के कुनबे को एकजुट रख पाती है, या बीजेपी 'ऑपरेशन लोटस' के जरिए तीसरी सीट भी अपनी झोली में डालने में कामयाब होती है।