नई दिल्ली/लखनऊ | 4 मई, 2026 पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों के शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की बढ़त ने राजनीतिक बयानबाजी को तेज कर दिया है। उत्तर प्रदेश AIMIM के प्रवक्ता शादाब चौहान ने इन रुझानों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए विपक्षी 'धर्मनिरपेक्ष' दलों और वर्तमान लोकतांत्रिक स्थिति पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।

'बहुसंख्यकवाद' की ओर बढ़ता लोकतंत्र?

शादाब चौहान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बंगाल और असम के रुझानों को चिंताजनक बताया। उन्होंने लिखा:

"बंगाल और असम के शुरुआती रुझान लोकतंत्र का बहुसंख्यकवादी स्वरूप प्रतीत होते हैं, जो किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं हैं।"

सेक्युलर दलों पर साधा निशाना

चौहान ने विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल केवल मुस्लिम वोटों के दम पर राजनीति कर रहे हैं, जबकि उनका अपना पारंपरिक वोट बैंक अब भाजपा की ओर खिसक चुका है।

दावा: "अपने आप को सेक्युलर बोलने वाले दलों के पास सिर्फ मुसलमान का वोट बचा है। उनके खुद के समाज का वोट 'भाजपाई' हो चुका है।"

अस्तित्व की लड़ाई: उन्होंने जोर देकर कहा कि अब वह समय आ गया है जब भारत के मुसलमानों को अपने राजनीतिक वजूद और अस्तित्व की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी।

"सिर्फ मुसलमान कर रहा भाजपा का विरोध"

AIMIM नेता ने अपने बयान में यह भी तर्क दिया कि वर्तमान में केवल मुस्लिम समुदाय ही भाजपा की 'संविधान विरोधी' नीतियों के खिलाफ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा:

मुसलमानों को अब दूसरे दलों पर भरोसा करना छोड़ देना चाहिए क्योंकि वे दल केवल उनके वोटों का इस्तेमाल सत्ता पाने के लिए करते हैं।

लोकतंत्र अब धीरे-धीरे अपनी मूल भावना खोकर बहुसंख्यकवाद की ओर बढ़ रहा है।

चुनावी माहौल में सरगर्मी

शादाब चौहान का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में भाजपा 190 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और असम में भी भगवा लहर दिखाई दे रही है। ध्रुवीकरण के इस माहौल में AIMIM का यह रुख आने वाले समय में मुस्लिम राजनीति की नई दिशा की ओर संकेत कर रहा है।