पटना/नई दिल्ली: बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत और एक बड़े उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं। बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का कीर्तिमान रचने वाले नीतीश कुमार अब राज्य की सक्रिय राजनीति से हटकर राज्यसभा का रुख करेंगे। मुख्यमंत्री ने स्वयं इस निर्णय की पुष्टि कर दी है, जिससे प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
'मार्गदर्शक' की भूमिका में होंगे नीतीश
नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर पोस्ट के जरिए अपने नामांकन की जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अब नई सरकार के लिए एक मार्गदर्शक (Mentor) के रूप में कार्य करेंगे। बिहार के विकास में उनके लंबे योगदान के बाद, यह कदम उनके राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
कांग्रेस का तीखा प्रहार: "यह सत्ता का तख्तापलट है"
इस फैसले पर विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने गुरुवार को नीतीश कुमार के इस कदम को जनता के साथ धोखा करार दिया।
जयराम रमेश के मुख्य आरोप:
जनादेश का अपमान: उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने जिस भरोसे के साथ मतदान किया था, यह निर्णय उस विश्वास के साथ विश्वासघात है।
नेतृत्व तख्तापलट: कांग्रेस ने इसे बिहार में 'नेतृत्व का तख्तापलट' बताया है, जिससे राज्य की स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं।
सत्ता परिवर्तन की साजिश: रमेश ने आरोप लगाया कि यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दरकिनार कर सत्ता हथियाने की एक सोची-समझी रणनीति है।
बिहार की राजनीति पर प्रभाव
नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से हटना और केंद्र की राजनीति (राज्यसभा) की ओर रुख करना बिहार में सत्ता समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| कार्यकाल | बिहार के सबसे लंबे समय तक रहने वाले मुख्यमंत्री |
| नया गंतव्य | राज्यसभा (संसद का उच्च सदन) |
| नया संकल्प | नई सरकार का मार्गदर्शन करना |
विपक्ष के हमलों के बीच अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नीतीश कुमार के जाने के बाद बिहार की कमान किसके हाथों में होगी और क्या 'नई सरकार' उनके मार्गदर्शन में जनता की उम्मीदों पर खरी उतर पाएगी।





