नई दिल्ली | लोकसभा में बुधवार को स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया। इस ऐतिहासिक बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार का पक्ष रखते हुए 56 मिनट का आक्रामक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने आंकड़ों के साथ राहुल गांधी और कांग्रेस की संसदीय कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए।

अमित शाह के संबोधन की 5 बड़ी बातें

1. बोलने के समय पर आंकड़ों की बाजीगरी

अमित शाह ने विपक्ष के "आवाज दबाने" के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि 18वीं लोकसभा में कांग्रेस सांसदों को भाजपा सांसदों की तुलना में दो गुना ज्यादा समय मिला।

तुलना: उन्होंने बताया कि 17वीं लोकसभा में महज 52 सदस्य होने के बावजूद कांग्रेस को भाजपा से 6 गुना अधिक समय दिया गया था।

2. राहुल गांधी की अनुपस्थिति पर कटाक्ष

शाह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, "जब सदन में बोलने का महत्वपूर्ण मौका आता है, तो वे या तो जर्मनी में होते हैं या इंग्लैंड में।" उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण और केंद्रीय बजट जैसी महत्वपूर्ण चर्चाओं में कई बार हिस्सा नहीं लिया।

3. "ये सदन मेला नहीं है"

स्पीकर के आचरण पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए शाह ने कहा कि सदन नियमों से चलता है।

"स्पीकर को नियमों के उल्लंघन पर रोकने का अधिकार है। जो नियमों का पालन नहीं करेगा, उसका माइक बंद ही होगा। यह सदन कोई मेला नहीं है।"

4. आचरण और मर्यादा का सवाल

अमित शाह ने राहुल गांधी के पुराने व्यवहार (गले मिलना, आंख मारना और फ्लाइंग किस) का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग खुद संसदीय मर्यादा का पालन नहीं करते, उन्हें स्पीकर के निष्पक्ष आचरण पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

5. राष्ट्रीय मुद्दों पर स्पष्टीकरण

अमेरिका ट्रेड डील: शाह ने आश्वस्त किया कि अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील में भारतीय किसानों का कोई नुकसान नहीं हुआ है।

चीन सीमा विवाद: पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की अप्रकाशित किताब का हवाला देने पर उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया और 'अक्साई चीन' के मुद्दे पर नेहरू काल की याद दिलाई।

AI समिट: दिल्ली में हुई ग्लोबल AI समिट के दौरान कांग्रेस के प्रदर्शन को शाह ने 'देश विरोध' करार दिया।

राहुल गांधी का 'ट्रैक रिकॉर्ड' (अमित शाह के अनुसार)

लोकसभा सत्रचर्चा का विषयभागीदारी की स्थिति
16वीं लोकसभाबजट और सरकारी विधेयकअधिकांश चर्चाओं से नदारद
17वीं लोकसभाधारा 370 और वक़्फ़ संशोधनचर्चा के दौरान अनुपस्थित
18वीं लोकसभाकेंद्रीय बजटभाग नहीं लिया

स्पीकर ओम बिरला की वापसी का मार्ग प्रशस्त

अविश्वास प्रस्ताव लंबित रहने के दौरान ओम बिरला ने उच्च नैतिक परंपरा का पालन करते हुए सदन की अध्यक्षता नहीं की थी। अब प्रस्ताव खारिज होने के बाद वे पुनः आसन संभालेंगे। करीब 119 विपक्षी सांसदों द्वारा पक्षपात के आरोपों को सदन ने संख्या बल और ध्वनिमत से पूरी तरह नकार दिया है।