नई दिल्ली

बॉलीवुड एक्ट्रेस और हिमाचल प्रदेश के मंडी से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद कंगना रनौत अपने बयानों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवादों के केंद्र में हैं। सोमवार (3 अगस्त, 2026) को कंगना द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो के बाद कांग्रेस ने उन पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कंगना को "नफरती और मौकापरस्त" करार देते हुए कहा कि वह हिंदू धर्म को बख्श दें।

'संघी' बनने के बयान पर सुप्रिया श्रीनेत का तंज

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने सोमवार शाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो पोस्ट जारी कर कंगना रनौत पर सीधा निशाना साधा।

सुप्रिया श्रीनेत ने वीडियो संदेश में कहा:

"कंगना जी कह रही हैं कि वह मॉडरेट हिंदू से संघी हिंदू में कन्वर्ट होना चाहती हैं। लेकिन बहना, संघ (RSS) में तो महिलाओं की एंट्री ही नहीं है, कैसे होइएगा?"

उन्होंने आगे बेहद कड़े शब्दों में कहा:

"आप हिंदू तो नहीं, लेकिन एक नफरती, मौकापरस्त, देश के युवाओं को गटर बुलाने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए पनौती जरूर हैं। और वही बनी रहिए, कम से कम हिंदू धर्म को बख्श दीजिए!"

कंगना रनौत ने वीडियो में क्या कहा था?

विवाद की शुरुआत कंगना रनौत के उस वीडियो से हुई जो उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया था। इस वीडियो में कंगना ने फिल्म इंडस्ट्री और समाज में हिंदू लड़कियों के वैचारिक झुकाव को लेकर अपनी राय रखी थी।

इस्लामिस्ट संपर्क पर सवाल: कंगना ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में कई हिंदू बेटियां न्यूट्रल या 'मॉडरेट' सोच रखती हैं, लेकिन किसी इस्लामिस्ट के संपर्क में आते ही (चाहे शादी हो, दोस्ती हो या संबंध) उनकी सोच पूरी तरह बदल जाती है और वे कट्टरपंथी हो जाती हैं।

'संघी' बनने का ऐलान: अपने अतीत में फिल्मों के किरदारों और गानों पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए कंगना ने कहा— "मैं हमेशा से एक मॉडरेट हिंदू थी। आज अगर लोग मुझसे पूछते हैं कि तुम कब से संघी बन गई? तो हां, मुझे संघी बनना है! मुझे बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा में ढलना है। मुझे कन्वर्ट होना है, मैं क्यों नहीं हो सकती?"

कंगना रनौत के इस वीडियो के बाद से ही सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है, जहाँ एक तरफ बीजेपी समर्थक उनके रुख का बचाव कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष इसे ध्रुवीकरण की राजनीति करार दे रहा है।