नई दिल्ली | विशेष संवाददाता संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार, 9 मार्च से शुरू होने जा रहा है, और पहले ही दिन भारतीय संसदीय इतिहास का एक बड़ा टकराव देखने को मिल सकता है। विपक्षी दलों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए दिए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर चर्चा और मतदान की प्रबल संभावना है। इस लड़ाई में अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी TMC ने भी कांग्रेस का साथ देने का ऐलान कर विपक्ष की एकजुटता को धार दे दी है।

विपक्षी एकजुटता: TMC के रुख में बड़ा बदलाव

शुरुआत में हिचकिचाहट दिखा रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) अब पूरी तरह से अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में आ गई है। पहले नोटिस पर हस्ताक्षर न करने वाली टीएमसी ने अब 'विपक्षी एकता' के नाम पर समर्थन में वोट करने का निर्णय लिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि अध्यक्ष का झुकाव सत्तापक्ष की ओर रहा है।

स्पीकर पर विपक्ष के गंभीर आरोप

कांग्रेस की अगुवाई में लाए गए इस प्रस्ताव में स्पीकर ओम बिरला पर 'भेदभावपूर्ण' आचरण के आरोप लगाए गए हैं:

बोलने की आजादी: आरोप है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों को सदन में बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।

निलंबन की कार्रवाई: आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को असंवैधानिक बताया गया है।

पक्षपात का आरोप: विपक्ष का कहना है कि सत्तापक्ष के सांसदों द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि महिला सांसदों पर 'अनुचित' आरोप लगाए गए।

क्या कहता है सदन का गणित?

संख्या बल के आधार पर देखें तो इस प्रस्ताव का गिरना लगभग तय माना जा रहा है। | पक्ष | सांसदों की संख्या | स्थिति | | :--- | :--- | :--- | | सत्तारूढ़ NDA | 293 | बहुमत के साथ सुरक्षित | | विपक्ष (INDIA गठबंधन) | 230+ | एकजुटता का प्रदर्शन | | कुल सदस्य | 541 | --- |

भले ही एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है, लेकिन विपक्ष इस मतदान को अपनी एकजुटता के 'शक्ति प्रदर्शन' के तौर पर देख रहा है।

व्हिप जारी: सांसदों को अनिवार्य उपस्थिति के निर्देश

बढ़ते राजनीतिक तापमान को देखते हुए दोनों मुख्य दलों ने कमर कस ली है:

BJP: अपने सांसदों को सत्र के पहले दो दिनों के लिए व्हिप जारी कर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।

कांग्रेस: अपने सांसदों को तीन दिनों तक सदन में डटे रहने को कहा है।

संवैधानिक प्रक्रिया: कुर्सी पर नहीं बैठेंगे बिरला

संसदीय नियमों के मुताबिक, जब अध्यक्ष के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन होता है, तो वे सदन की कार्यवाही में हिस्सा तो ले सकते हैं और अपना पक्ष भी रख सकते हैं, लेकिन वे अध्यक्ष की कुर्सी (Chair) पर नहीं बैठेंगे। उनकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष या पैनल का कोई सदस्य सदन का संचालन करेगा।